दमोह जिले के सिंगौरगढ़ में नए साल का जश्न मनाने पहुंचे सैलानियों को इस बार नियमों के चलते निराश होना पड़ा। सिंगौरगढ़ अब रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व का हिस्सा बन गया है, जिसकी वजह से सुरक्षा के नए नियम लागू कर दिए गए हैं।
.
इन नियमों के तहत अब जंगल के अंदर पैदल जाने या बाइक से घूमने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इस बदलाव की वजह से नए साल के पहले दिन यहां वह रौनक देखने को नहीं मिली जो हर साल रहती थी।
महंगी टिकट और चार पहिया की शर्त से बिगड़ा मजा
टाइगर रिजर्व के नए नियमों के मुताबिक अब केवल चार पहिया वाहनों को ही अंदर जाने की इजाजत है। इसके लिए शासन ने 1500 रुपए का शुल्क तय किया है। पर्यटकों और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए इतना किराया देना मुश्किल साबित हो रहा है।
यही वजह रही कि गुरुवार को दोपहर तक इलाका काफी सूना नजर आया और शाम को भी सैलानियों की संख्या पहले के मुकाबले बहुत कम रही।
भैंसा घाट से सेल्फी लेकर लौटे लोग
खूबसूरत वादियों, झरनों और वॉच टावर का दीदार करने आए कई लोग बिना अंदर जाए ही वापस लौट गए। कई सैलानियों ने अंदर जाने के बजाय भैंसा घाट की पहाड़ी के पास ही सेल्फी ली और वहीं से घर की राह पकड़ ली।
जहां हर साल हजारों की भीड़ उमड़ती थी, वहां इस बार संख्या सैकड़ों में ही सिमट कर रह गई। पर्यटकों का कहना है कि नियमों और ज्यादा किराए ने उनके घूमने का मजा किरकिरा कर दिया है।
डिप्टी रेंजर ने दी नियमों की जानकारी
इस मामले में डिप्टी रेंजर लइक खान ने बताया कि 1500 रुपए का टिकट शासन की ओर से तय किया गया है। उन्होंने माना कि यह किराया लोगों के लिए थोड़ा ज्यादा है। साथ ही सुरक्षा कारणों से अब दोपहिया वाहनों और पैदल जाने वालों को अनुमति नहीं दी जा रही है। इन्हीं कड़े नियमों के चलते सैलानी पहुंचे तो जरूर हैं, लेकिन उनकी संख्या पिछले सालों की तुलना में काफी कम रही है।