Indore Dirty Water Deaths: देश में इंदौर को आठ बार सबसे स्वच्छ शहर का तमगा मिल चुका है. लेकिन इसी शहर के भागीरथपुरा इलाके से जो तस्वीर सामने आई है, उसने इस दावे पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. यहां दूषित पानी पीने से 14 लोगों की मौत हो चुकी है, और हालात आज भी डरावने बने हुए हैं.
दूषित पानी बना मौत की वजह
भागीरथपुरा की गलियों में जगह-जगह गंदगी फैली है. नालियों का पानी सड़कों पर बहता रहता है. बदबू इतनी तेज है कि वहां कुछ देर खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है. इसी गंदे पानी ने लोगों की जिंदगी छीन ली, लेकिन जिम्मेदारों की नींद तब भी नहीं टूटी.
ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल
जब लोकल 18 की टीम ने स्थानीय लोगों से बात की, तो पता चला कि इलाके का ड्रेनेज सिस्टम सालों से खराब है. नगर निगम की पुरानी ड्रेनेज लाइन सड़क के आगे है, जबकि घरों की निकासी पीछे की ओर है. नतीजा ये कि गटर की लाइनें हमेशा जाम रहती हैं और गंदा पानी जमा रहता है.
शिकायतें हुईं, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिले
रहवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की, अफसरों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ भरोसा दिलाकर टाल दिया गया. न कोई स्थायी समाधान निकला, न हालात सुधरे.
पानी में कीड़े, बदबू और दवा जैसी गंध
इलाके के रहने वाले रोहन पुरानिया बताते हैं कि पिछले एक महीने से पानी की हालत और खराब हो गई थी. कभी पानी में कीड़े निकलते थे, कभी गंदगी, तो कभी नर्मदा लाइन के पानी से तेज बदबू आती थी. कई बार दवा जैसी अजीब गंध भी आती थी. शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई. उनका कहना है कि अगर समय रहते कदम उठाए जाते, तो शायद एक भी जान न जाती.
सिर्फ 20 मिनट आता है पानी
एक अन्य रहवासी बताते हैं कि दिन में मुश्किल से 20 मिनट पानी आता है. पहले 10 मिनट गंदा पानी बहाना पड़ता है, फिर पानी चखकर देखना पड़ता है कि पीने लायक है या नहीं. इसके बाद ही पानी भरा जाता है. यह सिलसिला महीनों से चल रहा है.
मौतों के बाद जागा प्रशासन
अब जब मौतें हो चुकी हैं, तब इंदौर नगर निगम आनन-फानन में खुदाई कर लीकेज ढूंढ रहा है. सवाल यही है कि अगर शिकायतों के समय ही कार्रवाई होती, तो क्या 14 मासूम जिंदगियां बच सकती थीं?