अलाव के सहारे सांप को बैठाया, फिर युवक ने की बातचीत।
भिंड जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर लहार क्षेत्र के आरुषी गांव में एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां गिर्राज शंकर शर्मा नाम के युवक ने सर्दी से बेहोश हुए काले सांप (कोबरा) को अलाव के पास तपाकर नई जिंदगी दी। इतना ही नहीं, युवक सांप से बातें भी
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बीएससी एग्रीकल्चर सेकंड ईयर के छात्र गिर्राज शंकर शर्मा ने बताया कि 31 दिसंबर की दोपहर वे अपने एक साथी के साथ बाइक से खेत जा रहे थे। रास्ते में उन्हें एक काला सांप पड़ा दिखाई दिया। पहले लगा कि उसकी मौत हो गई है, लेकिन पास जाकर देखा तो सांसें चल रही थीं। सर्दी के कारण वह बेहोश हो गया था। इसके बाद उन्होंने सांप को अलाव के पास बैठाया, जिससे गरमाहट मिलने पर वह होश में आ गया।
युवक अपने पास सांप को.बैठाकर हाथ फिरता रहा।
कहा- किसी को नुकसान मत पहुंचाना, तो सांप ने फन हिलाया गिर्राज ने बताया कि जब सांप ने फन उठाकर उनकी तरफ देखा, तो उन्होंने उससे कहा कि ‘इधर-उधर मत घूमो और किसी को नुकसान मत पहुंचाओ।’ इस दौरान सांप बार-बार अपना फन हिलाता रहा, जिससे ऐसा लगा कि वह उनकी हर बात का जवाब दे रहा है। करीब एक घंटे तक वहां रुकने के बाद सांप जंगल की ओर चला गया। युवक के घर के पास ही नाग देवता का एक छोटा मंदिर बना हुआ है, जहां परिवार सुबह-शाम पूजा करता है।
चाचा बोले- कोई तंत्र-मंत्र नहीं, यह कुलदेवता की कृपा है गिर्राज के चाचा अशोक शर्मा ने बताया कि वे किसी तरह का तंत्र-मंत्र या झाड़-फूंक नहीं जानते। लेकिन वे बिना किसी डर के काले सांप को पकड़ लेते हैं और उसे जहां बैठा देते हैं, वह वहीं बैठा रहता है। आसपास के गांवों में भी जब किसी के घर सांप निकलता है, तो लोग उन्हें ही बुलाते हैं और वे सांप को सुरक्षित स्थान पर छोड़ आते हैं। उनका कहना है कि यह सब उनके कुलदेव निरंजन देव की कृपा है।

युवक ने.सांप को आलाव.के सहारे बैठकर ठंड से.जान बचाई।
किंवदंती- महामारी के दौरान सांप ने की थी प्रसूता की रक्षा परिवार के सर्वेश शर्मा ने बताया कि निरंजन भगवान शिव का स्वरूप हैं और नागदेव को भी निरंजन कहा जाता है। उन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही एक कथा बताई। उनके अनुसार, एक समय महामारी के दौरान परिवार में सिर्फ ससुर और बहू ही जिंदा बचे थे। प्रसव के समय एक काला सांप प्रसूता (बहू) के पास बैठा रहा और बच्चे के जन्म तक उसकी रक्षा करता रहा। उसी दिन परिवार ने प्रण लिया कि वे कभी सांप को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। तभी से उन पर नागदेव की कृपा बनी हुई है।