सगराना प्लांट विवाद, किसानों की ‘हर घर नौकरी’ की मांग: मुआवजे-सुविधाओं पर 2 घंटे चली बैठक, ग्रामीण लिखित आश्वासन पर अड़े – Neemuch News

सगराना प्लांट विवाद, किसानों की ‘हर घर नौकरी’ की मांग:  मुआवजे-सुविधाओं पर 2 घंटे चली बैठक, ग्रामीण लिखित आश्वासन पर अड़े – Neemuch News


नीमच के पास ग्राम सगराना में गोल्डक्रैश सीमेंट प्लांट के निर्माण को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। सगराना संघर्ष समिति के नेतृत्व में किसान और ग्रामीण अपनी जमीन के हक और भविष्य की सुरक्षा को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे है

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शुक्रवार को इस गतिरोध को खत्म करने के उद्देश्य से प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच लगभग दो घंटे तक गहन चर्चा हुई। बैठक में ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में कहा कि प्लांट के लिए किसी भी निजी भूमि का अधिग्रहण किसान की मर्जी के खिलाफ नहीं होना चाहिए और न ही प्रशासन ने किसानों को जबरन नोटिस जारी करे।

रास्तों और आवागमन को लेकर सख्त शर्तें

ग्रामीणों ने अपनी खेती-बाड़ी को लेकर स्पष्ट मांग रखी है कि खेतों की ओर जाने वाले उनके पुराने रास्तों में कोई हस्तक्षेप न किया जाए। यदि प्लांट के लिए नया रास्ता बनता है, तो वह गांव से कम से कम 500 मीटर की दूरी पर हो।

इसके अलावा किसानों के आवागमन के लिए 30 फीट का अलग मार्ग तय किया जाए, जिस पर प्लांट प्रबंधन कोई तार फेंसिंग या गेट लगाकर अवरोध पैदा न करे।

प्रत्येक घर से एक नौकरी और वाहनों को प्राथमिकता

मुआवजे के अलावा ग्रामीणों ने रोजगार को लेकर कड़ी शर्तें रखी हैं। उनकी मांग है कि गांव के हर घर से कम से कम एक सदस्य को प्लांट में स्थायी नौकरी दी जाए और 8 घंटे से अधिक काम करने पर ओवरटाइम का भुगतान हो।

साथ ही, प्लांट के काम में लगने वाले वाहनों में गांव के प्रत्येक परिवार के एक वाहन को प्राथमिकता दी जाए और उसका उचित किराया तय हो।

प्रदूषण से बचाव और गांव के विकास का एजेंडा

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि प्लांट के प्रदूषण से फसल खराब होने की पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होगी और उसका मुआवजा कंपनी को ही देना होगा।

गांव के सर्वांगीण विकास के लिए 14 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया है, जिसमें नई सड़कें, स्ट्रीट लाइट, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल भवन और 50 बीघा जमीन पर गोशाला का निर्माण शामिल है।

फिलहाल प्रशासन ने इन मुद्दों को सुना है, लेकिन ग्रामीण ठोस और लिखित आश्वासन मिलने तक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।



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