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Agri Tips: खेती में घटते मुनाफे के बीच अब किसान खेत की मेड़ों से भी मजबूत आमदनी बना सकते हैं. सागौन के रूटसूट पौधे कम जगह में तैयार होकर भविष्य में महंगी इमारती लकड़ी का रूप लेते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक यह तरीका बिना फसल नुकसान के दीर्घकालिक आय का सुरक्षित विकल्प है.
Agri Tips: खेती में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के दौर में किसान अब परंपरागत फसलों से इतर ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जो बिना अतिरिक्त जोखिम के भविष्य में मजबूत आय दे सकें. इसी कड़ी में सागौन की खेती एक ऐसा विकल्प बनकर उभरी है, जो खेत की मेड़ों जैसी बेकार समझी जाने वाली जगह को भी कमाई का जरिया बना सकती है. रामटेकरी नर्सरी के रोपणी प्रभारी विष्णु तिवारी ने लोकल 18 को बताया कि किसान यदि खेतों की मेड़ों का सही उपयोग करें तो 10–15 साल में लाखों की अतिरिक्त आमदनी संभव है. वह भी बिना मुख्य फसल को नुकसान पहुंचाए.
मेड़ों का सही इस्तेमाल, फसल पर नहीं पड़ता असर
उन्होंने कहा कि सागौन के पौधे की कैनोपी बहुत ज्यादा फैलती नहीं है, इसलिए यह आसपास की फसलों पर छाया या पोषक तत्वों का नकारात्मक प्रभाव नहीं डालता. खेत की मेड़ पर इसे लगाने से एक ओर प्राकृतिक बाउंड्री तैयार होती है, वहीं दूसरी ओर लकड़ी के रूप में भविष्य का बड़ा निवेश भी खड़ा हो जाता है. आमतौर पर किसान मेड़ों को अनुपयोगी मानते हैं, लेकिन सागौन उन जगहों के लिए आदर्श पेड़ हैं, जहां नियमित खेती नहीं होती.
बाजार में सागौन की लकड़ी की भारी मांग
सागौन को इमारती लकड़ी की श्रेणी में रखा जाता है और इसकी बाजार में मांग हमेशा बनी रहती है. वर्तमान में सागौन की लकड़ी की कीमत ₹4500 से ₹6000 प्रति घन फुट तक पहुंचती है. वहीं तैयार अवस्था में एक घन मीटर सागौन की कीमत करीब ₹1.30 लाख तक बताई जाती है. ऐसे में यदि किसान अपने खेत के किनारों पर नियमित अंतराल में सागौन के पौधे लगाते हैं तो 10 से 15 साल में यह एक बड़ी पूंजी में बदल सकता है.
रूटसूट पौधा तैयार करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया
सागौन के रूटसूट पौधे तैयार करने की प्रक्रिया भी व्यवस्थित और वैज्ञानिक है. अप्रैल से मई के बीच ट्रीटेड बीजों को मदर बेड में बोया जाता है. अंकुरण के बाद नियमित सिंचाई, खाद और कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है. जनवरी के अंत या फरवरी की शुरुआत में जब पौधा तैयार हो जाते हैं तब उसे जड़ से उखाड़कर रूटसूट या देसी भाषा में कलम बनाया जाता है. इसके बाद बाविस्टिन फंगीसाइड में डुबोकर पॉलीपॉट में लगाया जाता है, जिसमें मिट्टी, वर्मी कम्पोस्ट और खाद का मिश्रण होता है.
देखरेख आसान, बढ़वार तेज
गर्मी से बचाव के लिए पौधों को घास या पैरा की शेड में रखा जाता है और नियमित सिंचाई की जाती है. 7 से 10 दिनों में नई पत्तियां निकल आती हैं और एक महीने में पौधा 1 से 1.5 फीट तक बढ़ जाता है. प्रति पौधा करीब 2 किलो वर्मी कम्पोस्ट या सड़ी गोबर की खाद देना लाभकारी होता है. साथ ही जानवरों से सुरक्षा के लिए फेंसिंग और कीट नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना जरूरी है.
ग्रामीण युवाओं के लिए दीर्घकालिक अवसर
सागौन के रूटसूट पौधे लगाकर किसान न सिर्फ अपनी जमीन की सुरक्षा करते हैं, बल्कि भविष्य के लिए एक मजबूत आर्थिक आधार भी तैयार करते हैं. खासकर सतना और बघेलखंड जैसे क्षेत्रों में जहां भूमि उपलब्धता अधिक है, यह मॉडल ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और निवेश का नया रास्ता खोल सकता है. खेती के घटते रिटर्न के बीच सागौन जैसी दीर्घकालिक योजना किसानों के लिए एक स्थायी और सुरक्षित विकल्प बनकर सामने आ रही है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें