Agri Tips: खेती को अगर सच में फायदे का धंधा बनाना है, तो अब सिर्फ गेहूं-चना तक सीमित रहना काफी नहीं है. परंपरागत खेती के साथ अगर किसान बागवानी और सब्जी की खेती को जोड़ लें, तो आमदनी पूरे साल बनी रहती है. खास बात ये कि कुछ ऐसे पौधे भी हैं, जो एक बार लग जाएं तो पीढ़ियों तक कमाई का जरिया बन जाते हैं. ऐसा ही एक पौधा कटहल का है. दावा किया जाता है कि कटहल का पेड़ करीब 100 साल तक जिंदा रहता है. बिना ज्यादा खर्च के सालों-साल फल देता है. यही वजह है कि किसान इसे ‘FD’ जैसी सुरक्षित आमदनी मानते हैं. कटहल का पौधा लगाने के करीब 3 से 5 साल बाद फल देना शुरू कर देता है. साल में दो बार फल देता है. एक बार पेड़ बड़ा हो जाए तो इसकी ज्यादा देखरेख की जरूरत भी नहीं पड़ती.
एक पौधा, कई फायदे
कटहल को फल और सब्जी दोनों रूपों में इस्तेमाल किया जाता है. कच्चे कटहल की सब्जी बनती है, जबकि पका कटहल फल के रूप में अच्छी कीमत दिलाता है. दिव्या कृषि केंद्र के नरेंद्र पटेल बताते हैं, “कटहल में आयरन, कैल्शियम, विटामिन A, C और पोटैशियम भरपूर होता है. इसकी मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है. पहले यह यूपी, बिहार और दक्षिण भारत में ज्यादा उगाया जाता था, लेकिन अब पूरे देश में इसकी खेती होने लगी है.”
कब और कैसे लगाएं कटहल
कटहल की खेती के लिए जून-जुलाई का समय सबसे अच्छा माना जाता है. क्योंकि, यह बरसात का मौसम होता है. सिंचाई पर खर्च कम आता है. एक हेक्टेयर में करीब 150 पौधे लगाए जा सकते हैं. पौधों के बीच 35 से 40 फीट की दूरी रखना जरूरी है. कटहल की खेती एकल भी की जा सकती है. दूसरी फसलों के साथ मिश्रित खेती के रूप में भी कर सकते हैं.
खेती की आसान विधि
जमीन को जैविक तरीके से तैयार किया जाता है. गड्ढों में गोबर की खाद, नीम खली और जैविक उर्वरक डाले जाते हैं. 15 दिन बाद पौधे लगाए जाते हैं और हल्की सिंचाई कर दी जाती है. अगर बीज से खेती की जाए तो फल आने में 5-6 साल लगते हैं. लेकिन, गुटी विधि से लगाए गए पौधे 2 साल में ही फल देने लगते हैं.
कम खर्च, ज्यादा मुनाफा
एक हेक्टेयर में कटहल की खेती करने में करीब 40 हजार रुपए का खर्च आता है. एक पेड़ से साल भर में 300 से 600 किलो तक उत्पादन हो सकता है. इस हिसाब से किसान साल में 3 से 4 लाख रुपए तक की कमाई कर सकते हैं. जैसे-जैसे पेड़ पुराने होते जाते हैं, उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ते जाते हैं.
अतिरिक्त कमाई का मौका
कटहल का पेड़ बड़ा और छायादार होता है. इसकी छाया में इलायची, काली मिर्च जैसी फसलें उगाकर अतिरिक्त आमदनी भी ली जा सकती है. भविष्य में कटहल की लकड़ी का इस्तेमाल फर्नीचर बनाने में भी किया जाता है.