Explainer: विजय हजारे ट्रॉफी में बल्लेबाज मचा रहे धमाल, बेचारे गेंदबाजों का बुरा हाल, भारतीय क्रिकेट को फायदा या नुकसान?

Explainer: विजय हजारे ट्रॉफी में बल्लेबाज मचा रहे धमाल, बेचारे गेंदबाजों का बुरा हाल, भारतीय क्रिकेट को फायदा या नुकसान?


घरेलू टूर्नामेंट विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में बल्लेबाजों की बल्ले-बल्ले है, तो वहीं ‘बेचारे’ गेंदबाज रहम की भीख मांग रहे हैं. इस सीजन अभी तक 5 राउंड हुए हैं और शतक जड़ने वालों की लिस्ट इतनी लंबी है कि सभी का नाम बताना भी आसान नहीं है. हां, एक आंकड़ा ऐसा है, जिसके बारे में जानकर आप यकीन कर लेंगे कि इस आर्टिकल की शुरुआत में गेंदबाजों को ‘बेचारा’ क्यों कहा गया है. विजय हजारे ट्रॉफी के इस सीजन में अभी तक हुए मुकाबलों की बात करें तो मुंबई के स्टार ऑलराउंडर शार्दुल ठाकुर इकलौते ऐसे गेंदबाज हैं, जिन्होंने 20 से कम की स्ट्राइक रेट से विकेट निकाले हैं.

बड़ा सवाल ये है कि घरेलू क्रिकेट में आई इस रनों की सुनामी से भारतीय क्रिकेट को फायदा है या नुकसान? फैंस के मन में ये भी सवाल ये है कि अचानक ऐसा क्या हुआ है कि टीम 50 ओवरों में 500 रनों का आंकड़ा भी आसानी से पार कर ले रही है. क्या विजय हजारे ट्रॉफी में सिर्फ बल्लेबाजों को ध्यान में रखकर पिच बनाया जा रहा है या फिर इसमें पिच का कोई रोल नहीं है? क्या T20 क्रिकेट का प्रभाव वनडे पर भी हो रहा है, जिसके चलते बल्लेबाज पहली गेंद से ही आक्रामक तेवर दिखा रहे हैं? आइए इन सभी सवालों के बारे में विस्तार से जानते हैं.

50-ओवर क्रिकेट पर T20 का प्रभाव

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एक जमाना था जब वनडे क्रिकेट के बारे में कहा जाता था कि इस फॉर्मेट में टेस्ट और टी20, दोनों का मजा है और बल्लेबाजों की अग्निपरीक्षा होती थी. शुरुआती 10-15 ओवरों में उनका कड़ा इम्तेहान होता था. वहीं, 30 ओवर के बाद इसपर टी20 का रंग चढ़ता था और चौकों-छक्कों की बरसात होती थी, लेकिन अब ये कहानी बहुत पुरानी हो गई है.

आज के दौर में टीमें वनडे क्रिकेट को दो T20 मैच के तौर पर देखना पसंद करती हैं. पहले 20 ओवर में भी पिटाई और उसके बाद भी. इसमें कहीं से दो राय नहीं है कि विजय हजारे ट्रॉफी में बल्लेबाज बेखौफ अंदाज में खेल रहे हैं और डर सिर्फ गेंदबाज को लग रहा है. पहली गेंद से ही अटैकिंग मोड अपनाकर वो गेंदबाजों पर इतना दबाव बना रहे हैं कि उसके बाद विकेट लेने की तलाश कम और बचने के बारे में ज्यादा सोचा जा रहा है. नतीजा ये निकल रहा है कि बॉलर्स ना रन लुटाने से बच पा रहे हैं और ना ही उन्हें विकेट मिल रही है. इस टूर्नामेंट में अब तक हुए मैचों को उठाकर देखेंगे तो पता चलेगा कि 50 प्रतिशत से भी अधिक बल्लेबाज LBW, बोल्ड या कीपर/स्लिप फील्डर्स के हाथों कैच आउट नहीं बल्कि छक्का उड़ाने के चक्कर में बाउंड्री पर कैच आउट हुए हैं.

सपाट पिच ने गेंदबाजों को किया बर्बाद

T20 मोड में बल्लेबाजी, निडर सोच और ऊपर से सपाट पिच… ऐसे में बल्लेबाजों के लिए काम आसान हो गया है और गेंदबाजों के लिए मुश्किल. विजय हजारे ट्रॉफी के इसी सीजन में बिहार ने अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ मैच में 574 रनों का माउंट एवरेस्ट खड़ा कर दिया था. वैभव सूर्यवंशी ने 36 गेंद तो उनके कप्तान सकीबुल गनी ने 32 गेंदों पर सेंचुरी जड़कर सनसनी मचा दी थी. यहीं से एक सवाल निकलकर आता है. लिस्ट ए क्रिकेट में सबसे तेज शतक जड़ने का रिकॉर्ड बनाने वाले सकीबुल क्या वाकई में इतने खतरनाक हैं? अगर हैं तो फिर आज तक किसी आईपीएल टीम की नजर उनपर क्यों नहीं गई? आपको मालूम है कि आईपीएल की सभी स्काउट टीम पूरे साल देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों पर पैनी नजर रखती है. जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पांड्या जैसे खिलाड़ी इसी प्रक्रिया के तहत आईपीएल में खेले और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

भारतीय क्रिकेट का फायदा या नुकसान?

विजय हजारे ट्रॉफी में रनों की बरसात से गेंदबाजों का बेड़ा गर्क तो हो ही रहा है, लेकिन इससे बल्लेबाजों का भी कुछ खास फायदा नहीं है. सबसे ज्यादा नुकसान में तो भारतीय क्रिकेट है. जी हां, सपाट पिच और कमजोर गेंदबाजों के खिलाफ रन बनाकर जब इन बल्लेबाजों को टीम इंडिया में जगह मिलती है और उन्हें ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड में आजमाया जाता है तो उनके प्रदर्शन में वो जलवा नहीं दिखता है, जो अभी दिख रहा है. करुन नायर, रजत पाटीदार, मयंक अग्रवाल ,साई सुदर्शन जैसे कई नाम हैं, जो डोमेस्टिक क्रिकेट में रनों का अंबार लगा रहे थे, लेकिन जब टीम इंडिया में उनकी एंट्री हुई तो प्रदर्शन इतना खराब रहा कि तुरंत छुट्टी भी हो गई.

सबसे बड़ा नुकसान तो ये है कि आज की तारीख में जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और अर्शदीप सिंह को छोड़ दें तो कोई भी ऐसा गेंदबाज नहीं है, जिसके बारे में ये कहा जा सके कि टीम में इसकी जगह पक्की है. ये सपाट पिच का ही नतीजा है कि रविचंद्रन अश्विन के संन्यास के बाद कोई दमदार ऑफ स्पिनर सामने नहीं आया है. घरेलू क्रिकेट में पानी की तरह बह रहे रन को रोकना होगा. ऐसी पिच तैयार करनी होगी, जहां गेंदबाज खुद पर भरोसा कर सकें कि वो बल्लेबाज को आउट कर सकते हैं. वहीं, इस हालात में अगर बैटर शतक जड़ता है तो उनकी असली काबिलियत की पहचान होगी. उसके बाद ही वो इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया या दुनिया में कहीं भी सफल हो सकेगा. 

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