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Whaet Farming Tips: मध्य प्रदेश गेहूं का बड़ा उत्पादक है. यहां का गेहूं न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी भेजा जाता है. एक-एक जिले में 2-5 लाख हेक्टेयर तक में गेहूं की फसल लहरा रही है. 15 अक्टूबर से 25 दिसंबर तक किसानों द्वारा गेहूं की बुवाई की गई. अब अगर किसान अपने गेहूं को चमकदार बनाना चाहते हैं तो ये उपाय आजमा सकते हैं.
बुवाई और सिंचाई होने के बाद फसल में अच्छी ग्रोथ के लिए या अच्छा उत्पादन लेने के लिए अब उर्वरकों का देना जरूरी हो गया है. क्योंकि, इन्हीं की वजह से अब फसल में स्टेप बाय स्टेप ग्रोथ देखने को मिलती है.

सबसे पहले बात करते हैं ऐसे किसानों की जिनकी फसल 60 दिन की हो गई है या 60-75 दिन की होने वाली है. उन्हें वैसे समय में अपनी फसल में नैनो यूरिया का छिड़काव कर देना चाहिए, इसकी वजह से गेहूं में जो फूल जाकर बालियां बनेंगी, उनमें अच्छा भराव देखने को मिलेगा. जिसकी वजह से दानों का आकार बड़ा चमकदार होगा.

किसान भाइयों को 500 ग्राम यानी कि आधा लीटर नैनो यूरिया लेना है, जिसकी कीमत 250 रुपये होती है. इसको ड्रोन के माध्यम से या फिर पंप से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं. ऐसा करने से फसल को फायदा होगा.
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बता दें, गेहूं की फसल में 25 से 30 क्विंटल उत्पादन लेने के लिए कम से कम पांच बार सिंचाई करने की आवश्यकता होती है. इसमें सही समय पर उर्वरक के रूप में यूरिया जिंक और सल्फेट भी डालना होता है. तीन बार यूरिया देने के बाद चौथी और पांचवी बार में अगर नैनो यूरिया का छिड़काव किया गया तो यह फसल के लिए काफी फायदेमंद होता है.

सागर में इस बार 3 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की गई थी. अधिकांश फसलों में तीन बार सिंचाई हो चुकी है. यहां पर पानी की कमी होने की वजह से इतने ही बार सिंचाई हो पाती है तो जहां पर अभी स्प्रिंकलर के माध्यम से या जिनके पास पानी की व्यवस्था है, वह खुले रूप से पानी दे रहे हैं तो वे नैनो यूरिया का छिड़काव करें.

आखरी बार नैनो यूरिया का छिड़काव तब करना है, जब गेहूं के दानों में दूध बनने लगता है. यानी पांचवी सिंचाई के बाद इस तरह से आखिरी के दिनों में उर्वरक देने से फसल अच्छी रहती है. उत्पादन बंपर मिलता है.

ऐसे किसान भाई जिन्होंने 20 दिसंबर तक अपनी जमीन पर गेहूं बोया था, अब वह सिंचाई करने के बाद पहला उर्वरक का छिड़काव करवा दें. इससे गेहूं में कल्ले अच्छे बनते और फुटाव भी अच्छा होता है. दूसरा यूरिया 40 दिन में तीसरा 60 दिन में देना है.

गेहूं कि फसल में कहीं-कहीं पर यूरिया के छिड़काव के बाद भी पत्तियां पीली पड़ती दिखाई दे रही हैं, जो प्रायः जिंक या सल्फर की कमी के कारण हो सकता है. इसके लिए 150 से 200 लीटर पानी /एकड़ की दर से 1 से 1.5 किलो यूरिया जिंक सल्फेट (Heptahydrate 21%) 300 से 500 ग्राम का घोल बनाकर सुबह या शाम के समय छिड़काव करें.