डॉ रवि तिवारी ने बनाया अंडरवॉटर रोबोट, एसोसिएट प्रोफेसर की रोचक कहानी

डॉ रवि तिवारी ने बनाया अंडरवॉटर रोबोट, एसोसिएट प्रोफेसर की रोचक कहानी


सतना. आईएएस और आईपीएस को आज भी देश की सबसे प्रतिष्ठित नौकरियों में गिना जाता है लेकिन बदलते दौर में कुछ प्रोफेशन ऐसे भी हैं, जो न सिर्फ सम्मान दिलाते हैं बल्कि सालाना पैकेज, सुविधाएं और सुकून के मामले में किसी वीआईपी लाइफ से कम नहीं हैं. ऐसी ही एक प्रेरक कहानी लेकर आया है लोकल 18, जहां सही फील्ड की तलाश आखिरकार एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर आकर थमी और इस सफर में कई ऐसे इनोवेटिव मॉडल तैयार हुए, जिन्हें खुद राज्य सरकार ने सराहा. लोकल 18 से खास बातचीत में वीआईटी चेन्नई यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रवि तिवारी बताते हैं कि उनका एकेडमिक सफर केवी-1 सतना से शुरू हुआ. शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने भोपाल के एलएनसीटी कॉलेज से बीई की पढ़ाई की और पूरे कॉलेज में प्रथम स्थान हासिल किया. बचपन में उनका सपना आईएएस-आईपीएस बनने का था. इसी वजह से उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी भी शुरू की.

आईएएस की तैयारी के दौरान ही डॉ रवि तिवारी ने इसरो और डीआरडीओ की लिखित परीक्षाएं पास कीं, हालांकि इंटरव्यू में सफलता नहीं मिल पाई लेकिन इसी बीच उन्होंने गेट परीक्षा क्रैक कर ली. जिसके बाद एनआईटी राउरकेला से एमटेक की पढ़ाई शुरू की. यहां भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और एमटेक डिग्री सेकंड रैंक के साथ पूरी की. एमटेक के बाद डॉ रवि तिवारी ने लगातार मेहनत करते हुए तीन साल 8 महीने में अपनी पीएचडी पूरी कर ली. इस दौरान उनके कई रिसर्च पेपर्स अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित हुए, जिनमें आईईईई ट्रांजैक्शन, आईईईई लेटर्स और वाइली ट्रांजैक्शंस जैसे नाम शामिल हैं. पीएचडी के बाद उन्होंने जीएच रायसोनी यूनिवर्सिटी नागपुर से अपने करियर की शुरुआत की. इसके बाद एमआईटीएस मदनपल्ली में सेवाएं दीं और फिलहाल डॉ रवि तिवारी वीआईटी चेन्नई में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं. वह पढ़ाने के साथ-साथ रिसर्च को भी बराबर समय देते हैं.

अंडरवॉटर रोबोट ने दिलाई पहचान
डॉ रवि के मेंटरशिप में तैयार अंडरवॉटर रोबोट को गुजरात रोबोटिक्स 4.0 प्रतियोगिता में सेकंड रनर-अप मॉडल के रूप में सम्मानित किया गया. इस प्रतियोगिता में 40 से ज्यादा प्रतिभावान टीमों के बीच मुकाबला हुआ था. इस प्रोजेक्ट के लिए टीम को 7 लाख रुपये की प्राइज मनी मिली, जिसे उन्होंने अपने अगले रिसर्च प्रोजेक्ट्स में निवेश कर दिया. वर्तमान में डॉ रवि तिवारी के अंडर कई रिसर्च स्कॉलर्स पीएचडी कर रहे हैं. कोई 5G और 6G कम्युनिकेशन पर काम कर रहा है, तो कोई स्टैटिस्टिकल सिग्नल प्रोसेसिंग के क्षेत्र में रिसर्च कर रहा है.

परिवार की उम्मीदें और अपनी पसंद
डॉ रवि बताते हैं कि उनके परिवार में अधिकतर लोग बायो फील्ड से जुड़े रहे हैं. उनके स्वर्गीय पिता रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर एजुकेशन रायपुर अपने बेटे को डॉक्टर बनाना चाहते थे. 11वीं से ही बायो लेने का दबाव था लेकिन इंजीनियरिंग में रुचि होने के कारण उन्होंने अलग राह चुनी. शुरुआत में परिवार का दबाव रहा लेकिन धीरे-धीरे उन्हें पूरा समर्थन मिला.

एसोसिएट प्रोफेसर बनने का रास्ता
उन्होंने कहा कि एसोसिएट प्रोफेसर बनने के लिए कम से कम पीएचडी डिग्री और तीन एससीआई पब्लिकेशन जरूरी होते हैं. सातवें वेतनमान के बाद इस पद पर न्यूनतम सालाना आय करीब 20 लाख रुपये तक पहुंच जाती है. यही वजह है कि यह प्रोफेशन आज सम्मान, सुकून और आर्थिक स्थिरता का बेहतरीन मेल बन चुका है.



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