नवजात की मौत, सीहोर जिला अस्पताल में दंपती का हंगामा: बोले- बच्ची का चेहरा तक नहीं दिखाया, शव देने से इनकार; सिविल सर्जन बोले- आरोप गतत – Sehore News

नवजात की मौत, सीहोर जिला अस्पताल में दंपती का हंगामा:  बोले- बच्ची का चेहरा तक नहीं दिखाया, शव देने से इनकार; सिविल सर्जन बोले- आरोप गतत – Sehore News



सीहोर जिले में सोमवार शाम जिला अस्पताल के सामने एक दंपती अपने बच्चों के साथ सड़क पर बैठ गए और अस्पताल की लापरवाही का रोष जताया। उनका आरोप था कि अस्पताल की व्यवस्थाओं के कारण उनकी नवजात शिशु बालिका की मौत हो गई और उन्हें बच्ची का शव देने से भी इनकार क

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भैरूंदा तहसील के निवासी संतोष जाट ने बताया कि उनकी गर्भवती पत्नी को 29 दिसंबर को भैरूंदा के अस्पताल से सीहोर रेफर किया गया था। देर रात 2 जनवरी को उनकी पत्नी ममता जाट ने डिलेवरी की। संतोष का कहना है कि डिलेवरी के दौरान मेटरनिटी वार्ड में जिम्मेदार महिला डॉक्टर मौजूद नहीं थी, जिससे पत्नी को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

आरोप बच्ची को देखने तक नहीं गया संतोष ने बताया कि नवजात बालिका को जन्म देने के बाद उसे और उनकी पत्नी को एसएनसीयू में रखा गया और बच्ची को देखने तक नहीं दिया गया। बाद में उन्हें सूचना मिली कि बच्ची की मृत्यु हो गई है। परिजनों का दुख और बढ़ गया जब डॉक्टरों ने नवजात का शव देने से इनकार कर दिया। नतीजतन संतोष और उनकी पत्नी सड़क पर बैठकर धरने पर बैठ गए।

धरने के दौरान सड़क पर यातायात बाधित हुआ और बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। घटना की जानकारी मिलने पर थाना प्रभारी रविन्द्र यादव मौके पर पहुंचे और परिजनों से बातचीत की। इस दौरान एक अनजान युवक भी घटना स्थल पर पहुंचा और अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगा। पुलिस ने उसे पकड़कर समझाइश देने के बाद वहां से भेजा।

वाहन सेवा नहीं ली, शव लेकर रवाना थाना प्रभारी और सिविल सर्जन डॉ. यूके श्रीवास्तव ने नवजात का शव उसके गांव तक पहुंचाने के लिए अस्पताल का शव वाहन उपलब्ध कराया। हालांकि संतोष ने शव वाहन लेने से इनकार कर अपनी बच्ची का शव लेकर चले गए।

सिविल सर्जन डॉ. यूके श्रीवास्तव ने बताया कि बच्ची प्रीमैच्योर थी और उसका वजन केवल 960 ग्राम था। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था और सर्वाइवल की संभावना बहुत कम थी। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों ने कोई लापरवाही नहीं की और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं।



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