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Shabbir Khan: बिहार के गेंदबाज शाबीर बशीर खान ने तहलका मचा दिया है. उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन किया. प्लेट ग्रुप के फाइनल में मणिपुर के खिलाफ उन्होंने घातक गेंदबाजी करते हुए 7 विकेट लिए. इस दौरान उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए हैट्रिक भी ली.
सिवान जिले के रहने वाले शाबीर बशीर खान ने विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन किया. प्लेट ग्रुप के फाइनल मुकाबले में बिहार और मणिपुर की टीमें आमने-सामने थीं, लेकिन इस मुकाबले में शाबीर की गेंदबाजी मणिपुर के लिए काल साबित हुई. बड़े मंच पर दबाव के बावजूद शाबीर ने जिस आत्मविश्वास के साथ गेंदबाजी की, उसने फाइनल मैच की तस्वीर बदल दी.

मैच में बिहार को पहले गेंदबाजी करने का मौका मिला.<br />कप्तान ने नई गेंद शाबीर बशीर खान को सौंपी. शाबीर ने शुरुआत से ही सटीक लाइन-लेंथ के साथ आक्रमण किया और मणिपुर के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया. उनकी गेंदों में स्विंग और सीम मूवमेंट साफ दिख रही थी. यही कारण है कि बल्लेबाज लगातार गलतियां करते नजर आए और विकेट गिरने का सिलसिला शुरू हो गया.

फाइनल मुकाबले में शाबीर ने कुल 8 ओवर गेंदबाजी की और सिर्फ 30 रन देकर 7 अहम विकेट अपने नाम किए. इस दौरान उन्होंने एक ओवर मेडन भी फेंका. एक ही मैच में सात विकेट लेना किसी भी गेंदबाज के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. खासकर तब जब मुकाबला फाइनल हो. बता दें कि लिस्ट ए क्रिकेट में एक पारी में सबसे ज्यादा 8 विकेट लेने का रिकॉर्ड है. वैसे बिहार की तरफ किसी गेंदबाज़ ने एक पारी में इतने विकेट नहीं लिए हैं.
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दिलचस्प बात यह रही कि पूरे विजय हजारे टूर्नामेंट में शाबीर खान का प्रदर्शन औसत रहा था. उन्होंने इससे पहले केवल तीन विकेट ही हासिल किए थे. लेकिन फाइनल जैसे बड़े और निर्णायक मुकाबले में उन्होंने खुद को पूरी तरह बदलते हुए सात विकेट झटक लिए. इस एक मैच ने उन्हें टूर्नामेंट में कुल 10 विकेट तक पहुंचा दिया और वह अचानक बिहार टीम के सबसे चर्चित खिलाड़ी बन गए. उन्होंने इस पारी में हैट्रिक भी ली. पांचवें ओवर में उन्होंने 3 बल्लेबाजों को लगातार आउट किया.

सिवान से आने वाले 28 वर्षीय शाबीर बशीर खान का क्रिकेट सफर संघर्षों से भरा रहा है. उनके करियर में कई बार ऐसा समय आया जब उन्हें टीम में मौका मिला, तो कई बार उन्हें ड्रॉप भी किया गया. बावजूद इसके उन्होंने कभी अभ्यास और मेहनत से समझौता नहीं किया. इस बार जब विजय हजारे ट्रॉफी के लिए उनका चयन हुआ, तो उन्होंने मन ही मन ठान लिया था कि इस मौके को किसी भी कीमत पर हाथ से नहीं जाने देंगे.

शाबीर खान का जन्म 1997 में सिवान जिले में हुआ था. वह राइट आर्म मीडियम पेस गेंदबाज हैं और जरूरत पड़ने पर दाएं हाथ से बल्लेबाजी भी कर सकते हैं. अपने करियर में वह दो बार रणजी ट्रॉफी टीम का हिस्सा रह चुके हैं, हालांकि इस बार उन्हें रणजी टीम से ड्रॉप कर दिया गया था. इसके बावजूद उन्होंने अपनी गेंदबाजी पर लगातार काम किया और खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा.

आंकड़ों की बात करें तो शाबीर ने अब तक फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 3 मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने 28 रन बनाए हैं. वहीं लिस्ट ए क्रिकेट में उन्होंने 9 मुकाबलों में 70 रनों का योगदान दिया है. गेंदबाजी में दोनों श्रेणी के टूर्नामेंटों को मिलाकर उनके नाम कुल 7 विकेट दर्ज हैं, हालांकि विजय हजारे फाइनल के बाद उनका स्कोरकार्ड जल्द ही अपडेट होने वाला है. इसके पहले क्लब क्रिकेट, इंटर डिस्ट्रिक्ट, स्टेट सहित कई टूर्नामेंटों में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है.

आपको बता दें कि अगर यह फाइनल मुकाबला बिहार जीत जाती है तो टीम विजय हजारे ट्रॉफी के एलीट ग्रुप में पहुंच जायेगी. शाबीर के लिए उनका यह प्रदर्शन करियर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है.