Last Updated:
Business Idea: बदलते लाइफस्टाइल के बीच नेचुरल फ्रेगरेंस वाले इत्र की मांग तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि छोटे स्तर पर अत्तर बनाने का व्यवसाय स्वरोजगार का मजबूत विकल्प बनकर उभरा है. कम जगह, सीमित मशीनरी और सरकारी योजना की मदद से महिलाएं भी इस काम को आसानी से शुरू कर सकती हैं.
Satna News: प्राकृतिक खुशबुओं की बढ़ती मांग ने इत्र के पारंपरिक व्यवसाय को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है. लोग अब केमिकल और अल्कोहल फ्री परफ्यूम की जगह नेचुरल, माइल्ड खुशबुओं को प्राथमिकता दे रहे हैं. ऐसे में छोटे स्तर पर इत्र का व्यवसाय शुरू करना न सिर्फ लाभकारी साबित हो रहा है, बल्कि यह महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का एक सम्मानजनक और सुरक्षित विकल्प भी बनकर उभरा है.
कम निवेश में शुरू हो सकता है कारोबार
इत्र व्यवसाय की सबसे बड़ी खासियत इसका लचीला निवेश मॉडल है. यदि कोई व्यक्ति केवल रीसेलिंग करना चाहता है यानी थोक में इत्र खरीदकर छोटी शीशियों में भरकर बेचना चाहता है तो इसकी शुरुआत मात्र ₹5,000 से ₹10,000 के निवेश में की जा सकती है. वहीं अगर आप खुद इत्र बनाना चाहते हैं तो ₹40,000 से ₹60,000 में छोटी मशीनरी और कच्चा माल आ सकता है. वहीं, एक व्यवस्थित छोटे प्लांट को स्थापित करने के लिए लगभग ₹2 लाख से ₹5 लाख तक का बजट पर्याप्त माना जाता है.
इत्र बनाने के लिए क्या चाहिए
इत्र निर्माण के लिए जरूरी कच्चा माल बाजार में आसानी से उपलब्ध है. इसमें गुलाब, चमेली जैसे फूलों की पंखुड़ियां, चंदन का तेल (बेस ऑयल), विभिन्न जड़ी-बूटियां और पैकिंग के लिए कांच की छोटी शीशियां शामिल हैं. लोकल 18 को जानकारी देते हुए उद्यान विकास अधिकारी सोहावल विकासखंड सुधा पटेल ने बताया, इत्र बनाने की प्रक्रिया में भारी मशीनों की आवश्यकता नहीं होती. यही कारण है कि महिलाएं इसे अपने घर के खाली कमरे से भी आसानी से शुरू कर सकती हैं.
PMFME योजना से मिलेगी बड़ी राहत
इत्र बनाने की प्रक्रिया फूलों और जड़ी-बूटियों के प्रसंस्करण से जुड़ी होने के कारण इसे सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के अंतर्गत माना गया है. ऐसे में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (PMFME) के तहत इस व्यवसाय के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध है. इस योजना में पात्र परियोजना लागत का 35% तक अनुदान मिलता है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹10 लाख है. इसके अलावा प्रोजेक्ट लागत का 90% तक ऋण बैंक से उपलब्ध हो सकता है, जिसमें आवेदक को केवल 10% स्वयं का अंशदान देना होता है. योजना के अंतर्गत ब्रांडिंग, मार्केटिंग और तकनीकी प्रशिक्षण की सुविधा भी दी जाती है.
पात्रता और आवेदन प्रक्रिया
PMFME योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और वह न्यूनतम 8वीं पास होना चाहिए. एक परिवार से केवल एक ही व्यक्ति इस योजना का लाभ ले सकता है. आवेदन के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट pmfme.mofpi.gov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण करना होता है. आवेदन के दौरान आधार कार्ड, बैंक विवरण, निवास प्रमाण पत्र, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और पासपोर्ट साइज फोटो की आवश्यकता होती है. यदि किसी को ऑनलाइन आवेदन में परेशानी आती है तो वह अपने जिले के उद्यानिकी विभाग से संपर्क कर सकता है जहां से आवेदन और प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने में मुफ्त सहायता दी जाती है. कुल मिलाकर इत्र का व्यवसाय कम पूंजी, सरकारी सहयोग और बढ़ती बाजार मांग के चलते स्वरोजगार की दिशा में एक मजबूत विकल्प बनता जा रहा है.
About the Author
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें