MP NEWS: बीते कुछ सालों में गांव से शहर आने वाले युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है. छोटी-छोटी आंखों में बड़े-बड़े सपने लेकर ये युवा पढ़ाई, नौकरी और बेहतर भविष्य की तलाश में शहरों का रुख करते हैं. लेकिन जैसे ही शहर की ज़िंदगी शुरू होती है, वैसे ही महंगाई का पहला झटका लग जाता है. खासकर लॉकडाउन के बाद हालात और बिगड़ गए हैं. कमरा हो, मकान हो या फिर पीजी सबके किराए आसमान छूने लगे हैं.
ऐसे में कई लोग मजबूरी में अपने सपनों को अधूरा छोड़कर वापस गांव लौट जाते हैं. लेकिन हकीकत ये भी है कि अगर सही जगह की जानकारी हो, तो आज भी हर शहर में सस्ते किराए के कमरे और मकान मिल सकते हैं. इसी कड़ी में आज हम आपको बालाघाट के उन इलाकों के बारे में बता रहे हैं, जहां कम बजट में रहना अब भी मुमकिन है.
महंगाई बढ़ी, तो किराया भी चढ़ा
बालाघाट जिला मुख्यालय है. आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में छात्र यहां पढ़ाई के लिए आते हैं. इन छात्रों के माता-पिता ज़्यादातर खेती या मजदूरी से जुड़े होते हैं. ऐसे में महंगे किराए उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी बन जाते हैं. ऊपर से हर किसी को हॉस्टल भी नहीं मिल पाता. नतीजा कम बजट में रहने की तलाश.
बालाघाट के इलाके, कहां क्या है?
बालाघाट शहर में काली पुतली चौक, बस स्टैंड, अंबेडकर चौक, प्रेम नगर, हनुमान चौक और मोती नगर को मुख्य इलाकों में गिना जाता है. वहीं बूढ़ी और भटेरा शहर के सबसे पुराने इलाके माने जाते हैं. इसके अलावा गायखुरी, गर्रा और सरेखा-कोसमी जैसे इलाके शहर के आउटर एरिया में आते हैं, जहां भीड़ कम और किराया थोड़ा हल्का होता है.
यहां मिल जाएंगे सस्ते कमरे और मकान
अगर आप कम बजट में रहना चाहते हैं, तो बूढ़ी, भटेरा और बैहर रोड के आसपास आपको आसानी से सस्ते कमरे मिल सकते हैं.
सिंगल रूम: ₹1500 से ₹2000
1 BHK मकान: ₹3000 से ₹4000
वहीं, गायखुरी, गर्रा और सरेखा-कोसमी जैसे आउटर इलाकों में इससे भी कम किराए में विकल्प मिल जाते हैं.
2 BHK मकान: करीब ₹5000 प्रति माह
छात्रों और नए नौकरीपेशा युवाओं के लिए ये इलाके काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं.
इन इलाकों में रहना पड़ेगा महंगा
अगर आप शहर के बीचों-बीच रहना चाहते हैं जैसे काली पुतली चौक, बस स्टैंड या मोती नगर तो जेब ढीली करनी पड़ेगी.
1 BHK: ₹5000 से ऊपर
2 BHK: ₹7000-₹8000 तक
इन्हीं इलाकों में ज़्यादातर नौकरीपेशा लोग रहते हैं, क्योंकि यहां सुविधाएं पास में मिल जाती हैं.
मकान लेने से पहले ये जरूर सोचें
कमरा या मकान किराए पर लेते वक्त अपनी जरूरत सबसे पहले तय करें. अगर कॉलेज या वर्कप्लेस के पास मकान लेते हैं, तो आने-जाने का खर्च और समय दोनों बचेंगे. थोड़ी समझदारी और सही जानकारी से शहर में रहना आज भी आसान हो सकता है.