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Mixed Farming In Winter: सीधी जिले के किसान अब सब्जी उत्पादन में मिश्रित खेती को तेजी से अपना रहे हैं. कम होती कृषि भूमि के कारण किसान एक ही खेत में मूली, पालक, धनिया के साथ खीरा, ककड़ी और लौकी की खेती कर रहे हैं. इससे कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन हो रहा है.
Mixed Farming In Winter: आधुनिकता के इस दौर में सीधी जिले के किसान तेजी से बदल रहे हैं. अब वे सिर्फ पारंपरिक खेती पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि नई तकनीकों और नगदी फसलों को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं. खास बात यह है कि यहां के किसान मिश्रित खेती के जरिए कम जमीन में ज्यादा उत्पादन कर रहे हैं और लाखों रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं.
रामपुर नैकिन क्षेत्र के किसान मनसुख लाल कुशवाहा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि वे बचपन से ही मिश्रित खेती करते आ रहे हैं. इस पद्धति से उन्हें कभी नुकसान नहीं हुआ. आमतौर पर एक बीघा जमीन में चार से पांच हजार रुपये की लागत आती है, जबकि सब्जियों की बिक्री से चार महीने तक लगातार कमाई होती रहती है. यही वजह है कि अब आसपास के किसान भी उनसे सीख लेकर इस खेती को अपनाने लगे हैं. मनसुख लाल बताते हैं कि उनके पास खेती के लिए सीमित जमीन है, इसलिए वे उसी जमीन में लौकी, खीरा, ककड़ी, धनिया, मूली और चुकंदर जैसी फसलें एक साथ उगाते हैं. इस मिश्रित खेती से उन्हें एक बीघा में करीब 80 से 90 हजार रुपये तक का मुनाफा हो जाता है. बाजार में इन सब्जियों की डिमांड हमेशा बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छे दाम मिलते हैं.
खेती के लिए कौन सा महीना बेस्ट
मनसुख लाल ने बताया कि जनवरी का महीना सबसे अहम माना जाता है. इस दौरान सबसे पहले लौकी, खीरा और ककड़ी के बीज बोए जाते हैं. इसके बाद धनिया, मूली और चुकंदर की बुवाई की जाती है. खेत को अच्छे से समतल कर क्यारियां बनाई जाती हैं और समय पर सिंचाई की जाती है. कुछ ही दिनों में धनिया, मूली और पालक जैसी फसलें तैयार हो जाती हैं, जिन्हें मंडी में बेच दिया जाता है. इसके बाद धीरे-धीरे लौकी और ककड़ी की पैदावार शुरू हो जाती है.
फसल की कटाई के बाद बचे पौधों को खेत में ही हरी खाद के रूप में मिला दिया जाता है. इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और अगली फसल के लिए जमीन तैयार हो जाती है. इस खेती में गोबर से तैयार जैविक खाद का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे लागत भी कम होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है.
मनसुख लाल बताते हैं कि जनवरी में तैयार नर्सरी से फरवरी में रोपाई करने पर मार्च तक किसान ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं. खीरा, लौकी, ककड़ी के साथ पालक, लाल भाजी और धनिया की खेती जल्दी तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को शुरुआती दिनों में ही आमदनी मिलने लगती है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें