‘मिशन 15921’ तक पहुंचने के लिए जो रूट का रोडमैप तैयार

‘मिशन 15921’ तक पहुंचने के लिए जो रूट का रोडमैप तैयार


नई दिल्ली. जब डैरेन सैमी ने वानखेड़े स्टेडियम में अपने विदाई टेस्ट मैच की पारी के दौरान सचिन तेंदुलकर को स्लिप में कैच किया था, तब स्कोर को भी शायद यही लगा होगा कि अब टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का शिखर हमेशा के लिए तय हो गया है. कोई भी खिलाड़ी उस रिकॉर्ड के करीब नहीं पहुंचेगा, उसे तोड़ना तो दूर की बात थी. क्रिकेट के सबसे महान प्रारूप में, महानतम खिलाड़ी ने सबसे ज्यादा रन बनाए. जब तेंदुलकर ने हर्षा भोगले के साथ अपनी भावुक विदाई स्पीच साझा की थी, तब रन के लिहाज़ से दूसरे नंबर पर  बल्लेबाज़ महेला जयवर्धने थे, जिनके नाम 10,806 रन थे जो तेंदुलकर के ऐतिहासिक 15,921 रनों से 5,000 से भी ज्यादा पीछे थे और महेला भी सिर्फ 10 महीने बाद ही संन्यास ले चुके थे.

उधर, लगभग 5,000 मील दूर यॉर्कशायर में, एक 11 टेस्ट मैच खेल चुका जो रूट ऑस्ट्रेलिया में अपने पहले एशेज दौरे की तैयारी कर रहा था. उस समय वह तेंदुलकर के लगभग 16,000 टेस्ट रनों के आंकड़े से 15,000 से भी ज्यादा रन पीछे थे और उनके खाते में सिर्फ 763 रन थे. किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि यही ऊंची कोहनी और सीधी स्टांस वाला यह खिलाड़ी न केवल तेंदुलकर के रिकॉर्ड के करीब पहुंचेगा, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के बादशाह को पछाड़ने का गंभीर दावेदार भी बनेगा.

रिकॉर्ड्स के रास्ते पर रूट

युगों की तुलना करना मुश्किल है तेंदुलकर ने शायद ज्यादा गुणवत्ता और धार वाले गेंदबाज़ों का सामना किया. उन्होंने तीन पीढ़ियों में बल्लेबाज़ी की और हालात के हिसाब से अपने खेल को ढालाजो हर महान खिलाड़ी नहीं कर पाता, लेकिन जो रूट से कुछ भी छीना नहीं जा सकता,जो अब तेंदुलकर से सिर्फ 1,984 रन पीछे हैं. तेंदुलकर के 15,921 रनों को अब तक कभी “छुए जाने” का खतरा नहीं लगा था अब लग रहा है. एससीजी में खेली गई शानदार 160 रन की पारी ने न सिर्फ रूट को रिकी पोंटिंग के साथ 41 शतकों की बराबरी पर ला खड़ा किया, बल्कि उन्हें (सिर्फ रनों के लिहाज़ से) ‘सर्वकालिक महान टेस्ट बल्लेबाज़’ के खिताब के बेहद करीब पहुंचा दिया. कुछ दिन पहले ही 35 साल के हुए जो रूट के लिए यह शायद सबसे साफ मौका है कि वह इस रिकॉर्ड को बोझ नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक उपलब्धि में बदल दें.

जो रूट के पक्ष में सब कुछ

पूर्व इंग्लिश कप्तान के पक्ष में हर चीज़ जाती दिख रही है वह मैथ्यू हेडन के रिकॉर्ड की “इज्जत बचाने” के बाद अब अंतिम बाधा पार करने को तैयार हैं. ऑस्ट्रेलिया अब रूट के लिए आखिरी चुनौती नहीं रहा वह दबाव भी खत्म हो चुका है. इंग्लैंड के मौजूदा WTC चक्र में 11 और टेस्ट मैच खेलने हैं, यानी रूट के पास 22 पारियों का मौका है, जिससे वह 15,921 के आंकड़े के और करीब पहुंच सकते हैं. 2021 से अब तक, रूट निस्संदेह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ टेस्ट बल्लेबाज़ रहे हैं. WTC युग में, जहां टेस्ट मैचों का चार दिन तक चलना भी एक लग्ज़री लगता है और गेंदबाज़ों का दौर लौट आया है, वहां भी रूट अलग ही ऊंचाई पर खड़े हैं. उन्होंने 6114 रन 56.09 की औसत से बनाए हैं, जिसमें 24 शतक शामिल हैं. यानी 2013 से 2020 के बीच उनके खाते में 17 शतक थे, जबकि अगले पांच वर्षों में उन्होंने 24 शतक जड़ दिए.अगर वह इसी रफ्तार से चलते रहे, तो उन्हें तेंदुलकर को पीछे छोड़ने के लिए सिर्फ 35 और टेस्ट पारियों की जरूरत होगी और वह इसे और जल्दी भी कर सकते हैं.

उनकी अगली 12 टेस्ट पारियां घरेलू मैदानों पर होंगी. कोविड के बाद से इंग्लैंड में रूट का औसत 64.8 रहा है 2021 से अब तक वह हर 2.3 टेस्ट में एक शतक लगाते हैं. इस साल इंग्लैंड की मेजबानी में न्यूज़ीलैंड और पाकिस्तान आ रहे हैंयानी रनों की बरसात तय है. इसके बाद दक्षिण अफ्रीका का दौरा होगा, जहां रूट का औसत 50 है, और वहां की कठिन पिचें स्पिन के खिलाफ उनकी रन बनाने की क्षमता को और निखारेंगी.

2027 में टूट सकता है रिकॉर्ड 

अगर औसत के नियम को भी मान लें, तो फरवरी 2027 तक रूट अपने खाते में 600 रन और जोड़ सकते हैं. तब भी वह 35 के ही रहेंगे. चूंकि इंग्लैंड WTC को प्राथमिकता नहीं देता, इसलिए रूट का संन्यास किसी WTC फाइनल पर निर्भर नहीं होगा. जब वह लिटिल मास्टर को पीछे छोड़ेंगे, तब उनका विदाई पल सुनियोजित हो सकता है. फिटनेस कोई समस्या नहीं है, और रूट कम से कम दो साल और खेलेंगे. 15,921 तक की दूरी अब बहुत ज्यादा नहीं लगती. बल्लेबाज़ी की शुद्ध गुणवत्ता के लिहाज़ से, रूट में गिरावट के कोई संकेत नहीं हैं. विराट कोहली की तरह कोविड के बाद उनका खेल नहीं गिरा है, और न ही केन विलियमसन की तरह वह सिर्फ घरेलू मैदानों पर बेहतर हैं. फिलहाल, रूट को ऐसी कोई समस्या नहीं है. संक्षेप में कहें,तो अगर जो रूट सर्वाधिक टेस्ट रन बनाने का रिकॉर्ड नहीं तोड़ते, तो यह हैरानी की बात होगी. उनके पास हर तरह की बढ़त मौजूद है और सायद यह खेल उन्हें तब तक नहीं छोड़ेगा, जब तक वह सचिन तेंदुलकर को पीछे नहीं छोड़ देते.



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