बालाघाट. अगर आप किसान सम्मान निधि की पात्रता रखते हैं और अब तक फार्मर आईडी नहीं बनाई है, तो आपको सम्मान निधि से हाथ धोना पड़ सकता है. दरअसल सरकार किसानों का डेटा एक ही आईडी में लाना चाहती है ताकि शासकीय योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके लेकिन ग्रामीण अंचलों में कई लोगों को फार्मर आईडी की जानकारी ही नहीं है. एक ऐसे ही किसान बालाघाट के कुम्हारी के है, जिन्होंने बताया कि उन्हें किसान सम्मान निधि मिलती है लेकिन उन्होंने अब तक फार्मर आईडी नहीं बनाई है. बीते कुछ सालों में किसानों को सुविधा देने के लिए कई तरह की योजनाएं शुरू की गई हैं. इसमें खासतौर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित कई योजनाएं हैं लेकिन ये योजनाएं बंद हो सकती हैं. दरअसल सरकार ने किसानों के लिए खास तरह की योजना बनाई है, जिसमें किसानों को विशेष आईडी यानी किसान पहचान पत्र बनवाना जरूरी हो गया है लेकिन अब किसी किसान के पास फार्मर आईडी नहीं है, तो उन्हें शासन की तमाम योजनाओं से वंचित रहना पड़ सकता है.
क्या है किसान आईडी?
किसान आईडी यानी फार्मर आईडी किसानों के लिए एक डिजिटल पहचान पत्र है, जो उनकी जमीन, फसल और किसान के विवरण का ब्योरा रखता है. इसमें सरकारी योजनाओं का सीधा और पारदर्शी तरीके से फायदा मिलता है यानी कि फर्जीवाड़े से भी बच सकते हैं.
क्यों जरूरी है फार्मर आईडी?
फार्मर आईडी किसानों की पहचान की पुष्टि करता है और सही व्यक्ति की पहचान में मदद करता है. इससे योजनाओं का सीधा लाभ मिलता है. यह बिचौलियों की जरूरत को खत्म करता है. फार्मर आईडी बैंक लोन या फिर मुआवजे के लिए बार-बार दस्तावेज जमा करने की जरूरत को खत्म करता है.
फार्मर आईडी कैसे बनाएं?
बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना ने लोकल 18 को बताया कि किसान भाई घर बैठे भी फार्मर आईडी बना सकते हैं लेकिन उनकी सुविधाओं के लिए पटवारी किसानों के गांवों में जाकर उनकी आईडी बना रहे हैं. किसान भाई सीएससी सेंटर जाकर भी अपनी आईडी बना सकते हैं. इसके अलावा https://mpfr.agristack.gov.in/farmer-registry-mp/#/ पर भी किसान भाई अपनी आईडी बना सकते हैं.
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसान भाई अगर फार्मर आईडी नहीं बनाते हैं, तो किसानों को कई समस्या का सामना कर पड़ सकता है. अगर आईडी नहीं, तो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का पैसा नहीं मिलेगा. वहीं खाद और बीज पर मिलने वाली छूट का फायदा भी नहीं मिलेगा. इसके अलावा सरकारी मंडी में फसल बेचने, फसल बीमा करवाने और खेती के लिए मिलने वाली मदद से भी किसान वंचित रह सकते हैं.
अगर कभी प्राकृतिक आपदा जैसे- सूखा, ओलावृष्टि, अतिवृष्टि से फसल बर्बाद होती है, तो आईडी न होने से मुआवजा मिलना भी मुश्किल हो जाएगा. साथ ही बैंकों से किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लेने में भी समस्या आएगी.