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Ujjain News: मान्यता है कि दान से न केवल ग्रह दोष शांत होते हैं बल्कि पितरों की कृपा भी मिलती है. श्रद्धा भाव से पितरों को याद कर दान करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है. मान्यता है कि दान-पुण्य से न सिर्फ पुण्य फल की प्राप्ति होती है बल्कि पितृ, देव और ऋषि ऋण से भी छुटकारा मिलता है.
उज्जैन. नववर्ष की शुरुआत के साथ ही भारत में जिस पर्व का सबसे अधिक इंतजार किया जाता है, वह है मकर संक्रांति. यह दिन सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश का संकेत देता है, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना गया है. मकर संक्रांति को जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच और शुभ परिवर्तन की शुरुआत के रूप में देखा जाता है. यह पर्व केवल एक दिन का उत्सव नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत उदाहरण भी है. अलग-अलग राज्यों में इसे अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है. उत्तर भारत में यह मकर संक्रांति के नाम से प्रसिद्ध है, तो दक्षिण भारत में पोंगल के रूप में नई फसल और समृद्धि का उत्सव मनाया जाता है. हर रूप में मकर संक्रांति सूर्य उपासना और खुशहाली के संदेश को दर्शाती है.
मकर संक्रांति पर स्वादिष्ट व्यंजनों का महत्व
इस पावन अवसर पर पारंपरिक खानपान का विशेष महत्व माना जाता है. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी, दही-चूड़ा, तिल से बने लड्डू, गुड़, चावल और दाल जैसे सात्विक आहार ग्रहण करने की परंपरा प्रचलित है. तिल और गुड़ का सेवन शरीर में ऊष्मा बनाए रखता है और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है. साथ ही यह आपसी सौहार्द, प्रेम और मधुर रिश्तों का संदेश भी देता है.
स्नान के बाद जरूर करें दान
शास्त्रों के अनुसार, दान-पुण्य को कभी भी किया जा सकता है लेकिन अगर विशेष तिथियों में कुछ विशेष वस्तु का दान किया जाए, तो सालभर ग्रहों के राजा सूर्य की तरह भाग्य चमकता है. मकर संक्रांति के शुभ दिन ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी या जल स्रोत में स्नान कर सूर्यदेव की विधिवत पूजा करनी चाहिए. स्नान आदि के बाद दान-पुण्य करने से जीवन में सुख, समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है. इस दिन तिल, गुड़, दही, दाल, चावल, वस्त्र और कंबल का दान विशेष फलदायी माना गया है. मान्यता है कि ऐसे दान से कुंडली में सूर्य और शनि की स्थिति मजबूत होती है और कई ग्रह बाधाएं दूर हो जाती हैं.
पितृदोष से मिलेगी मुक्ति
मकर संक्रांति के पावन पर्व पर लोग स्नान के बाद अन्न, गुड़, काले तिल, ऊनी वस्त्र सहित अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करते हैं. इस शुभ दिन खिचड़ी या फिर चावल, उड़द की दाल और सब्जियों का दान विशेष रूप से प्रचलित है. मान्यता है कि दान करने से न केवल ग्रह दोष शांत होते हैं बल्कि पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है. श्रद्धा भाव से पितरों का स्मरण कर दान करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है. माना जाता है कि दान-पुण्य से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और पितृ, देव और ऋषि ऋण से छुटकारा मिलता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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