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Indian Skimmer: मध्य प्रदेश के सीधी जिले के सोन घड़ियाल अभ्यारण्य क्षेत्र में एक बार फिर विदेशी प्रवासी पक्षियों की आमद से प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. ठंड के मौसम की शुरुआत के साथ ही सोन नदी के तट पर तीन दर्जन से अधिक की संख्या में दुर्लभ भारतीय स्कीमर (Indian Skimmer) पक्षी पहुंच चुके हैं.इन प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी से न केवल क्षेत्र की पारिस्थितिकी को मजबूती मिली है, बल्कि आने वाले दिनों में इनकी संख्या और बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है.
सोन नदी के शांत तट पर विदेशी प्रवासी पक्षी<br />ठंड के मौसम की शुरुआत के साथ ही सोन नदी के तट पर तीन दर्जन से अधिक दुर्लभ भारतीय स्कीमर (Indian Skimmer) प्रवासी पक्षियों ने दस्तक दी. इस दृश्य से अभ्यारण्य का प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता दोनों बढ़ गए हैं.

भारतीय स्कीमर का अनूठा शिकार का अंदाज<br />भारतीय स्कीमर अपनी लंबी चोंच से जल की सतह को छूते हुए शिकार करते हैं. यह उनकी खास शैली पर्यावरण प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों के लिए आकर्षण का केंद्र है.

नदी किनारे बने रेत के ढेरों पर प्रजनन<br />प्रवासी स्कीमर पक्षी विशेष रूप से नदी किनारे बने रेत के ढेरों को अंडे देने के लिए चुनते हैं. वर्तमान में देखे गए तीन दर्जन पक्षी आगे चलकर अपनी संख्या दोगुनी कर सकते हैं.<br />भारतीय स्कीमर अपनी लंबी चोंच से जल की सतह को छूते हुए शिकार करते हैं. यह उनकी खास शैली पर्यावरण प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों के लिए आकर्षण का केंद्र है.
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चितरंगी वन के राजघाट और कुठली घाट में प्रवासी पक्षी<br />सोन घड़ियाल अभ्यारण्य के चितरंगी वन परिक्षेत्र के राजघाट और कुठली घाट प्रवासी पक्षियों के प्रमुख डेरा स्थल बने हैं. यहां की खुली रेत, शांत वातावरण और पर्याप्त मछलियां पक्षियों के लिए अनुकूल हैं.

लंबी दूरी तय कर पहुंचे विदेशी मेहमान<br />चीन, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों से लंबी यात्रा करके ये प्रवासी पक्षी सीधी जिले में पहुंचे हैं. उनका आगमन क्षेत्र की स्वच्छता और सफल संरक्षण प्रयासों का प्रमाण है.

जैव विविधता और पर्यटन को नया आयाम<br />वन विभाग और संजय टाइगर रिजर्व की टीम लगातार इन पक्षियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए गश्त बढ़ा रही है और लोगों से भी पक्षियों को परेशान न करने की अपील की जा रही है. अगर अनुकूल परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में सीधी जिले में प्रवासी पक्षियों की संख्या में और वृद्धि होगी, जिससे पर्यटन और जैव विविधता दोनों को नया आयाम मिलेगा.