गुल्लक के 3 हजार से शुरू किया जूस का बिजनेस, अब परवीन रोज कमा रही हजारों; जानें संघर्ष भरी कहानी 

गुल्लक के 3 हजार से शुरू किया जूस का बिजनेस, अब परवीन रोज कमा रही हजारों; जानें संघर्ष भरी कहानी 


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लोकल 18 की टीम में जब महिला परवीन खान से बात की तो उन्होंने बताया कि मेरे पति का कोरोना काल में काम छूट गया घर परिवार चलाना मुश्किल जा रहा था. मैंने अपने गुल्लक में बच्चों के लिए पैसे जमा कर रखे थे जब उस गुल्लक को फोड़ कर देखा तो उसमें ₹3000 निकले ₹3000 से ही मैं जूस के ठेले की लालबाग रोड पर शुरुआत कर दी लोगों को मेरे हाथों का जूस पसंद आने लगा लोग

कोरोना काल ने जहां हजारों परिवारों की रोजी-रोटी छीन ली. वहीं, कुछ लोगों ने हालात से हार मानने के बजाय नई राह चुनी. मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले की परवीन इसकी मिसाल है. जिन्होंने मुश्किल वक्त में हिम्मत और मेहनत को अपना हथियार बनाया. महज ₹3000 से शुरू किया गया जूस का छोटा-सा ठेला आज उनके परिवार की आजीविका का मजबूत सहारा बन चुका है. संघर्ष से सफलता तक का यह सफर न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आत्मविश्वास और मेहनत से हालात बदले जा सकते है.

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में रहने वाली परवीन ने बताया कि कोरोना काल में उनके पति का काम छूट गया था. जिससे घर में काफी तंगी हो गई थी. परवीन ने ₹3000 जमा कर जूस के ठेले की शुरुआत की. आज वे रोजाना ₹2000 से ₹3000 की कमाई कर रही है. परवीन का कहना है कि उन्होंने कठिनाइयों और संघर्ष का सामना करते हुए सफलता पाई. वे अन्य महिलाओं से भी निवेदन करती है कि हिम्मत न हारे और संघर्ष करते रहे. सफलता अवश्य मिलेगी.

आज परवीन और उनके पति मिलकर जूस का ठेला लगाकर अच्छी कमाई कर रहे है. उनका सपना है कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करे. जिसके लिए वे यह काम कर रहे है. महिला ने लोकल 18 की टीम को बताया कि उनके पति का कोरोना काल में काम छूट गया था और घर चलाना मुश्किल हो गया था. उन्होंने बच्चों के लिए जमा किए पैसे गुल्लक से निकाले. जिसमें ₹3000 थे. उन्हीं पैसों से उन्होंने लालबाग रोड पर जूस का ठेला शुरू किया. लोगों को उनका जूस पसंद आने लगा और वे सुबह से शाम तक जूस पीने आने लगे.

ग्राहकी बढ़ने पर पति ने भी सहयोग करना शुरू कर दिया. अब दोनों मिलकर ठेले का संचालन करते है. जिससे रोजाना ₹2000 से ₹3000 की कमाई हो जाती है. वे 30 रुपए में एक गिलास जूस बेचते है और पिछले 15 सालों से यह ठेला लगा रहे है.

ठेले की शुरुआत पत्नी ने की थी और पति ने सहयोग किया. शुरुआत में पति घर पर रहते थे. लेकिन बाद में लोगों के आने पर उन्होंने भी सहयोग करना शुरू कर दिया. अब दोनों मिलकर सुबह से देर शाम तक जूस के ठेले का संचालन करते है. उनके ठेले पर मौसंबी और पाइनापल का जूस बेचा जाता है जो लोगों को बहुत पसंद आता है.

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