गेहूं की फसल पर छिड़क दें 100 रुपये की ये चीज, जड़माहू, बारवार्म, दीमक तीनों का हो जाएगा इलाज

गेहूं की फसल पर छिड़क दें 100 रुपये की ये चीज, जड़माहू, बारवार्म, दीमक तीनों का हो जाएगा इलाज


Last Updated:

Wheat Crop Tips: देर से बोई गई गेहूं फसल में जड़माहू लगने की समस्या ज्यादा आ रही है. वहीं बारवार्म और दीमक भी लग रहा है. इन तीनों को कंट्रोल करने के लिए एक ही दवा आती है. जिसके इस्तेमाल का खर्च प्रति एकड़ 100 रुपये आता है. जानें एक्सपर्ट टिप्स…

Agri Tips: नए साल की शुरुआत होते ही ठंड ने अपने तेवर दिखाना शुरू कर दिए हैं. इसकी वजह से फसलों में झुलसा लगने, पाला पड़ने जैसी चिंताएं किसानों को सत रही हैं. इस बीच गेहूं की फसल में जड़माहू लगने की शिकायतें भी आ रही हैं. 30 से 50 दिन की फसल होने की अवधि में इसका प्रकोप देखने को मिलता है. सागर बुंदेलखंड में लाखों हेक्टेयर में गेहूं की फसल किसानों द्वारा बोई गई है. ऐसे में किसानों की चिंता लाजिमी है. वहीं, एक्सपर्ट ने बताया कि किसान किस तरह अपनी फसल का बचाव करें. किस तरह से मॉनिटरिंग करें और कैसे कीट को कंट्रोल करें.

गेहूं की फसल में जड़माहू का प्रकोप 
जिन किसानों द्वारा नवंबर के आखिरी सप्ताह या दिसंबर की शुरुआत में गेहूं की बुवाई की गई थी, ऐसे किसानों की फसल में जड़ माहू लगने की समस्या सामने आ रही है. जब गेहूं की फसल में यह कीड़ा लगता है तब पौधों के रस को चूस लेता है. इसकी वजह से पौधों का हरा पन गायब हो जाता है और वह पीले पड़ने लगते हैं. अगर किसान अपनी फसल की अच्छे से मॉनिटरिंग नहीं करते हैं और जड़माहू का प्रकोप हो जाता है तो फिर उनकी फसल को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है.

ऐसा हो तो तुरंत सलाह लें
इसलिए किसान बुवाई करने के बाद जब 20 से 25 दिन की फसल हो जाए तब लगातार अपनी फसल को देखते रहें. कहीं उनकी फसल पीली तो नहीं पड़ रही है. कहीं ऊपर नीचे बीच के हिस्से में गेहूं के पौधों में पीलापन तो नहीं आ रहा. साथ ही गेहूं के साथ कई तरह के खरपतवार भी होते हैं. इन सब को भी देखते रहें. जैसे ही आपको यह फसल के दुश्मन मिलते हैं वैसे ही इनको कंट्रोल करने के उपाय करें. इसके लिए कृषि वैज्ञानिक, कृषि अधिकारी, एक्सपर्ट की सलाह ले सकते हैं.

100 रुपए के खर्चे में बचाव 
कृषि वैज्ञानिक राजेश द्विवेदी बताते हैं कि गेहूं में पीलापन दो वजहों से आता है. एक तो जब फसल में पोषक तत्वों की कमी होती है तो इसमें यूरिया जिंक और सल्फेट की कमी से अलग-अलग तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं, जो पीलापन को लेकर ही होते हैं. दूसरा उस समय पीलापन देखने को मिलता है, जब जड़माहू लग जाता है. इस बार जड़माहू लगने की समस्या ज्यादा आ रही है. इसके साथ बारवार्म और दीमक भी लग रहा है. इन तीनों को कंट्रोल करने के लिए एक ही दवा आती है, जो बाजार में रीजेंट के नाम से जानी जाती है. Regent (Fipronil 5 SC) – 250 ML का प्रति एकड़ के हिसाब से अगर स्प्रे कर दें तो यह तीनों ही डिजीज से फसल का बचाव हो जाता है. इसका खर्च करीब-करीब 100 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से आता है.

जड़माऊ की पहचान का तरीका 
जड़माहू की पहचान का आसान तरीका है, जब गेहूं की फसल में पीलापन नजर आता है और यूरिया देने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा तो उसका हम  पौधा उखड़ते हैं. पौधे में देखते हैं कि उसकी जड़ में छोटा भूरे-भूरे रंग का हल्का सा कीट है. अगर यह दिख रहा है तो फिर इसमें जड़ माहू लग चुका है. इसके लिए बाजार से मिलने वाली जरूरी दवाओं का छिड़काव करना पड़ता है, जिससे यह कंट्रोल हो जाता है.

गेहूं में सिंचाई और यूरिया इस अवधि में दें
बुंदेलखंड में इस बार मक्का की फसल की लेट हार्वेस्टिंग होने की वजह से गेहूं की बुवाई पिछड़ गई. जिस वजह से 20 दिसंबर तक यहां पर किसान गेहूं की बुवाई करते रहे. सबसे पहले तो उन्हें सिंचाई करने के साथ यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करनी है, जिसमें प्रति एकड़ 40 किलो यूरिया का छिड़काव करना है. 20 से 25 दिन की फसल पर पहला छिड़काव, दूसरा छिड़काव 40 से 45 दिन की फसल में तीसरा छिड़काव 75 दिन की फसल में करना है.

About the Author

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

homeagriculture

गेहूं की फसल पर छिड़क दें ₹100 की चीज, जड़माहू, बारवार्म, दीमक तीनों का इलाज



Source link