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shami deserves treatment like starc ऑस्ट्रेलिया अपने सीनियर तेज़ गेंदबाज़ों को संभालकर रखता है,उनका वर्कलोड मैनेज करता है और बड़े मुकाबलों के लिए तैयार करता है. भारत में उल्टा ट्रेंड दिखता है जैसे ही कोई तेज़ गेंदबाज़ 30 के पार जाता है, उसे “ट्रांज़िशन फेज़” का शिकार बना दिया जाता है.
नई दिल्ली. 35 साल की उम्र क्रिकेट में अक्सर एक सवाल बन जाती है फिटनेस का, फॉर्म का और भविष्य का लेकिन यही उम्र जब एशेज़ जैसे बड़े मंच पर मिचेल स्टार्क को मैन ऑफ़ द सीरीज़ बनाती है, तो उसे “अनुभव की जीत” कहा जाता है ऑस्ट्रेलिया गर्व से मानता है कि उम्र नहीं, प्रदर्शन मायने रखता है. वहीं दूसरी तरफ़ भारत में 35 साल के मोहम्मद शमी को टीम से बाहर रखने की चर्चाएं तेज़ हैं.
यहां मुद्दा उम्र का नहीं, सोच का नज़र आता है. ऑस्ट्रेलिया अपने सीनियर तेज़ गेंदबाज़ों को संभालकर रखता है,उनका वर्कलोड मैनेज करता है और बड़े मुकाबलों के लिए तैयार करता है. भारत में उल्टा ट्रेंड दिखता है जैसे ही कोई तेज़ गेंदबाज़ 30 के पार जाता है, उसे “ट्रांज़िशन फेज़” का शिकार बना दिया जाता है. मिचेल स्टार्क को स्टार इसलिए नहीं कहा जाता क्योंकि वह युवा हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि टीम मैनेजमेंट उनके अनुभव पर भरोसा करता है. अगर यही भरोसा शमी को मिले, तो वह भी बड़े मैचों में मैच विनर साबित हो सकते हैं. जैसा वह पहले कई बार कर चुके हैं.
स्टार्क स्टार हैं, तो शमी बेकार कैसे?
दो अलग अलग देशों के लिए तेज गेंदबाज शमी और स्टार्क की उम्र बराबर है, जज़्बा बराबर है और प्रदर्शन भी बोल रहा है, तो ट्रीटमेंट अलग क्यों.अगर स्टार्क एशेज़ में हीरो बन सकता है, तो मोहम्मद शमी को सिर्फ़ उम्र के आधार पर किनारे लगाना कितना न्यायसंगत है? यही बहस आज भारतीय क्रिकेट के चयन तंत्र को आईना दिखाती है. हैरानी की बात यह है कि शमी किसी भावनात्मक कोटे पर नहीं, बल्कि ठोस प्रदर्शन के दम पर सवाल पूछने का हक़ रखते हैं. घरेलू क्रिकेट में 17 मैचों में 50 से ज़्यादा विकेट लेना यह बताता है कि उनकी धार अभी कुंद नहीं हुई है. सीम मूवमेंट, अनुभव और मैच की नब्ज़ पहचानने की काबिलियतये सब आज भी शमी के पास मौजूद हैं.
स्टार्क बने सुपर स्टार
मिचेल स्टार्क, जो पहले से ही इस सीरीज के स्टार खिलाड़ी थे, दूसरी नई गेंद से इंग्लैंड के प्रतिरोध को तोड़ते हुए सीरीज में 31 विकेट लेकर लौटे. पांचों टेस्ट मैचों में बाएं हाथ के इस गेंदबाज की निरंतरता ने उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार दिलाया. स्टार्क ने 20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट छोड़ दिया और टेस्ट क्रिकेट को प्राथमिकता दी, जिसके परिणाम साफ दिखाई दे रहे थे! स्टार्क के आंकड़े बताते हैं कि वे कितने निर्णायक खिलाड़ी थे. 35 वर्षीय स्टार्क ने दो बार प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार जीता, दो बार पांच-पांच विकेट लिए और बल्ले से भी शानदार प्रदर्शन करते हुए दो अर्धशतकों सहित 156 रन बनाए. गुरुवार को उन्होंने टेस्ट इतिहास में बाएं हाथ के गेंदबाज द्वारा सबसे अधिक विकेट लेने के रंगना हेराथ के रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली.