गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) परिसर में डॉक्टरों के लिए बने 15 आवास, अमृत फार्मेसी, सुलभ शौचालय समेत अन्य भवनों के बिजली का भुगतान बीते 3 साल से सरकारी फंड से किया जा रहा है।
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अब तक करीब एक करोड़ रुपए से अधिक का बिल सरकारी फंड से किया जा चुका है। यह खुलासा GMC में कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष मयंक अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई EC की बैठक में हुआ है। इस दौरान जब डीन डॉ. कविता एन सिंह और हमीदिया अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन से इन बिल के भुगतान की जानकारी मांगी गई तो उनके पास कोई जबाव नहीं था।
वहीं, बैठक के दौरान जब इस मुद्दे पर किसी के पास कोई ठोस जानकारी नहीं थी तो GMC डीन डॉ. सिंह ने कहा कि जैसा चल रहा है चलने दो।
सब मीटर लगे हैं लेकिन रीडिंग नहीं ली गई
कैंपस में मौजूद सभी आवास और भवनों में सब मीटर लगें हैं लेकिन आखिरी बार रीडिंग 2022 में ली गई थी। इसके बाद से इन भवनों में कई लोग आए और चले गए। कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं जो रिटायर्ड हो चुके हैं। अब 3 साल बाद जिम्मेदारों को याद आया है कि इन भवनों से बिजली का बिल लेना होता है। लेकिन, अब तक जो फंड सरकारी खाते से खर्च हुआ है उसके भुगतान की जिम्मेदारी किसकी होगी, यह तय नहीं हैं। तीन घंटे चली EC की बैठक में जब अध्यक्ष मयंक अग्रवाल ने पूछा कि यह जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की थी या कॉलेज प्रबंधन की तो ना डीन और ना ही अधीक्षक इसका जबाव दे सके।
बिजली बिल के बजट की व्यवस्था
हमीदिया अस्पताल और गांधी मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग के बिजली बिल का भुगतान सरकार से ग्लोबल बजट से होता है। वहीं, हॉस्टल के बिल का भुगतान कॉलेज प्रबंधन अपने ऑटोनॉमस बजट से करता है
26 नर्सिंग ऑफिसर्स के हुए गायब
दूसरा सबसे अहम एजेंडा नर्सिंग ऑफिसर्स के लंबे समय से गायब रहने का था। उनकी सेवा समाप्ति की कार्रवाई को लेकर कॉलेज प्रबंधन ने पेशकश की। इस पर कुछ सवाल-जवाब हुए।
अध्यक्ष- ‘क्या आपने, अपना होमवर्क पूरा कर लिया है? डीन- ‘नहीं… नहीं पूरा किया है।’ अध्यक्ष- ‘तो फिर इस मुद्दे को एजेंडे में क्यों रखा गया है?’
बैठक में सबसे ज्यादा जोर आउटसोर्स स्टाफ की अवधि बढ़ाने पर है। रेडियोडायग्नोसिस विभाग में सीटी स्कैन और एमआरआई जांच सही से रखने के लिए 4 सीटी और 4 एमआरआई टेक्नीशियन की सेवाएं पहले तीन माह बढ़ाई गई थीं। अब इन्हें 6 माह और बढ़ाने का प्रस्ताव है। वहीं कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग में एकमात्र परफ्यूजनिस्ट के मेडिकल छुट्टी और सेवानिवृत्ति को देखते हुए आउटसोर्स पर 1 हाई-स्किल्ड परफ्यूजनिस्ट रखने के फैसले को कार्योत्तर अनुमोदन के लिए रखा गया है।
अब प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलने की तैयारी
हमीदिया अस्पताल में जननी सुरक्षा योजना, एसएनसीयू और टेलीमेडिसिन सेंटर के लिए 5 कंप्यूटर ऑपरेटर आउटसोर्स एजेंसी के जरिए रखने और भुगतान एनएचएम बजट से करने पर भी मुहर लग सकती है। वहीं नॉलेज शेयरिंग मिशन बंद होने के बाद एमपी कॉन के कर्मचारियों के 4.95 रुपए लाख के लंबित भुगतान पर निर्णय लिया जाना है। बैठक में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलने का मुद्दा भी अहम है। अमृत फार्मेसी के पास 200–300 वर्गफुट जगह पर जन औषधि केंद्र खोलने को कार्योत्तर अनुमोदन प्रस्तावित है, जिससे मरीजों को सस्ती दवाएं मिल सकेंगी।
आरआईआरडी में 32 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने पर चर्चा
इसके अलावा, फायर सेफ्टी ऑडिट और फायर एनओसी, अतिथिगृह के किराये को स्वशासी मद में जमा करने, बिजली-पानी के बकाया भुगतान की व्यवस्था, ई-ऑफिस के लिए टेक्निकल सपोर्ट स्टाफ, और क्षय चिकित्सालय परिसर में 32 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसे मुद्दे भी एजेंडे में हैं। साथ ही डीएसीपी और चयन वेतनमान से जुड़े दर्जनों चिकित्सकों के आदेश संशोधन पर भी चर्चा होगी।