नए साल की पहली कालाष्टमी कब? काल भैरव की पूजा से दूर होंगे दुख-दर्द और पाप

नए साल की पहली कालाष्टमी कब? काल भैरव की पूजा से दूर होंगे दुख-दर्द और पाप


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Kalashtami 2026: काल भैरव भगवान शंकर के ही उग्र और रक्षक स्वरूप माने जाते हैं. कालाष्टमी पर जो भक्त विधि-विधान से बाबा काल भैरव की पूजा करते हैं, उनके जीवन से पाप, कष्ट और दुख दूर होने लगते हैं.

उज्जैन. पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पर्व मनाया जाता है. इस दिन भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप श्री काल भैरव की विशेष आराधना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव की कृपा से भय, बाधा और जीवन की कठिन परिस्थितियों से मुक्ति मिलती है. कालाष्टमी का महत्व तंत्र साधना के लिहाज से भी अत्यंत विशेष माना गया है. साधक इस दिन विशेष मंत्र-जप, पूजा और अनुष्ठान करते हैं. मान्यता है कि नए साल की पहली कालाष्टमी पर यदि विधि-विधान से ज्योतिषीय उपाय किए जाएं, तो आने वाले समय में संकट, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव से राहत मिल सकती है. उज्जैन के प्रसिद्ध आचार्य आनंद भारद्वाज बताते हैं कि इस शुभ तिथि पर कुछ सरल उपायों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है और काल भैरव की विशेष कृपा प्राप्त कर सकता है. आइए जानते हैं कालाष्टमी के प्रभावशाली उपाय और पूजा विधि.

कब मनाई जाएगी कालाष्टमी?
वैदिक पंचांग के अनुसार, 10 जनवरी को सुबह 08 बजकर 23 मिनट पर माघ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि शुरू होगी. वहीं 11 जनवरी को सुबह 10 बजकर 20 मिनट पर अष्टमी तिथि का समापन होगा. इस प्रकार 10 जनवरी को कालाष्टमी मनाई जाएगी.

कालाष्टमी व्रत का महत्व
काल भैरव भगवान शिव के ही उग्र और रक्षक स्वरूप माने जाते हैं. कालाष्टमी के पावन अवसर पर जो श्रद्धालु विधि-विधान से काल भैरव बाबा की पूजा करते हैं, उनके जीवन से पाप, कष्ट और दुख धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं. इस दिन श्रद्धा भाव से व्रत और आराधना करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. मान्यता है कि इससे कुंडली में मौजूद राहु दोष के प्रभाव भी कम हो जाते हैं.

महाकाल की नगरी में विशेष महत्व
भगवान काल भैरव का मंदिर क्षिप्रा नदी के किनारे भैरवगढ़ क्षेत्र में स्थित है. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां भगवान काल भैरव की प्रतिमा को शराब का भोग लगाया जाता है और काल भैरव स्वयं शराब ग्रहण करते हैं. पुजारी की ओर से शराब का प्याला काल भैरव के मुख से लगाया जाता है. यह शराब पल भर में गायब हो जाती है. यह चमत्कार देखने लोग देश-विदेश से आते हैं.

जरूर करें इन मंत्रों का जाप
– ओम शिवगणाय विद्महे गौरीसुताय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात।।
– ओम कालभैरवाय नम:
– ओम भ्रां कालभैरवाय फट्
– धर्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम्। द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये।।

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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