सबसे स्वच्छ शहर इंदौर पानी वितरण व्यवस्था के प्रबंधन और रखरखाव में भी देश-दुनिया के शहरों से पीछे है। भागीरथपुरा में पानी वितरण लाइन में लीकेज ढूंढने में नगर निगम नर्मदा प्रोजेक्ट के अमले को 10 दिन लग गए और इन्हें सुधारने में करीब 60 दिन लग जाएंगे।
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दरअसल इंदौर में आज भी जमीन की नमी और चेंबर खोलने के पारंपरिक तरीकों से लीकेज खोजे जा रहे हैं, वहीं देश के कई शहरों में आधुनिक टेक्नॉलाजी व एआई आधारित स्मार्ट तरीके से 24 घंटे में व्यवस्था सुधार किया जा रहा है।
इंदौर में करीब 1800 करोड़ रुपए खर्च करके नर्मदा से पानी वितरण की व्यवस्था तैयार की है। अब 2200 करोड़ का चौथा चरण लाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए कुशल कर्मचारियों की कमी होने के अलावा तकनीकी समाधानों में भी हम सक्षम नहीं हैं। पूरे साल रखरखाव के लिए 20 से 25 करोड़ का बजट दिया जाता है।
यह लीकेज ठीक करने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। आज भी निगम जुगाड़ और पारंपरिक तकनीक अपना रहा है। हाल ही में केंद्र सरकार ने भी अमृत प्रोजेक्ट में सेंसर आधारित, एआई नेटवर्क, स्मार्ट मीटर और स्काडा जैसे नियंत्रण सिस्टम अपनाने पर जोर दिया है।
देश में दिल्ली, बेंगलुरू, पुणे व जमशेदपुर जैसे शहर तकनीकी रूप से लीकेज ढूंढने में सक्षम है, लेकिन इंदौर में पूरा नेटवर्क अस्त-व्यस्त, पुरानी और नई लाइनों की मिक्सिंग है। पूरे शहर का पानी वितरण नेटवर्क, सीवरेज नेटवर्क की तकनीकी मैंपिग भी नहीं है।
- 20 फीसदी पानी इंदौर में लाइनों में लीकेज से बर्बाद होता है।
- 25 करोड़ का बजट रखरखाव के लिए दिया जाता है हर साल
दुनिया स्मार्ट… हमारा पानी अब भी रिस रहा
देश में… पुणे, दिल्ली में स्मार्ट तकनीक
1. पुणे: स्मार्ट मीटर डिजिटल आई की तरह काम करता है। इससे रीयल टाइम डाटा मिल रहा है। चोरी, लीकेज का तुरंत पता चल जाता है। तीन लाख मीटर लगाए, इससे 30 फीसदी नुकसान कम हुआ। 2. दिल्ली: लीकेज का पता लगाने के लिए हीलियम गैस तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। इसमें पाइप लाइन में गैस भरकर लीकेज पता करते हैं। 3. बेंगलुरू: एक पूरे नेटवर्क की मैपिंग करके स्मार्ट तकनीक का उपयोग कर रहे है। इसके लिए आईटी मेप पर वॉटर और सीवरेज लाइनों को चिन्हित कर देते है। 4. चंडीगढ़: अब 24 घंटे पानी सप्लाय मॉडल की ओर बढ़ रहा है। इस तकनीक में पाइपलाइन हमेशा भरी रहती है। पानी की गुणवत्ता सुधरती है और लीकेज का भी पता लग जाता है।
विदेश में... मोबाइल पर तत्काल अलर्ट
- इजराइल में स्मार्ट ग्रिड सिस्टम है। यहां शहर का सिस्टम वाटर नेटवर्क एक सॉफ्टवेयर से जुड़ा है। पाइप लाइनों की छोटी से छोटी कमी भी एआई आधारित सिस्टम पता कर ली जाती है।
- जापान में पाइप लाइनों में सेंसर आधारित फ्लो मीटर लगे हैं। यह पानी के फ्लो से लीकेज चिह्नित कर देते हैं।
- सिंगापुर में पूरा देश ही डिजिटल ट्विन तकनीक का उपयोग करता है। पाइप लाइन का पूरा नेटवर्क डिजिटल मैप पर है। लीकेज होने पर तुरंत रेड अलर्ट दे देता है।
- अमेरिका में आईओटी आधारित त्वरित रिस्पांस सिस्टम काम करता है। इससे लोगों को मोबाइल पर तत्काल अलर्ट मिल जाता है।
भास्कर एक्सपर्ट
पूरी व्यवस्था का अध्ययन करने की जरूरत जल प्रबंधन व सीवरेज व्यवस्था की जानकारी एकत्रित करके जीआईएस मैप बनाएं। अभी नक्शे भी नहीं है। प्रभावी लोगों के कहने पर भी कई लाइनें डाल दी गई। इनको भी चिह्नित करके नक्शे में शामिल करें और इनके रखरखाव की बड़ी योजना बनाएं, जिससे साफ पानी लोगों को मिल सकेगा। – प्रो संदीप नारूलकर, जीएसआईटीएस
नई अरबन प्लानिंग में जरूरी कर रहे वर्तमान में कई तकनीकी समाधान उपलब्ध है। इंदौर जैसे शहर के लिए स्काडा सिस्टम सबसे बेहतर उपाय होगा। इससे पानी का वितरण और लीकेज दोनों चिह्नित हो सकेंगे। – प्रो. गौरव वैद्य, स्कूल ऑफ प्लानिंग व आर्किटेक्ट, भोपाल
आज से शुद्ध जल अभियान भागीरथपुरा में किरकिरी होने के बाद सरकार शनिवार से शुद्ध जल अभियान चलाएगी। अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन व नीरज मंडलोई ने शुक्रवार रात इंदौर में बैठक लेकर अफसरों से बात की। यह भी तय हुआ कि शहर की जलापूर्ति व्यवस्था की समीक्षा होगी। कलेक्टर निगरानी करेंगे कि मरीजों का इलाज नि:शुल्क हो।