कम खर्च में बड़ा काम! कड़ाके की ठंड में बगिया को पाले से बचाएंगे ये देसी उपाय, खेतों के लिए भी जरूरी

कम खर्च में बड़ा काम! कड़ाके की ठंड में बगिया को पाले से बचाएंगे ये देसी उपाय, खेतों के लिए भी जरूरी


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Agriculture Tips: कड़ाके की ठंड और पाले का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि बगिया के नाजुक पौधों पर भी पड़ता है. ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही सब्जियों, फूलों और फलदार पौधों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते देसी और आसान उपाय अपना लिए जाएं, तो ठंड के मौसम में भी बगिया हरी-भरी और सुरक्षित रह सकती है.

Agriculture Tips: सर्दी में जैसे-जैसे तापमान गिरता है, वैसे-वैसे बगिया और खेतों में लगे पौधों पर पाले और ठंड का खतरा बढ़ जाता है. सब्जियों, फूलों और फलदार पौधों को ठंड से होने वाला नुकसान सीधे उत्पादन और गुणवत्ता को प्रभावित करता है. खासकर रात में पड़ने वाली कड़ाके की ठंड पौधों की जड़ों और पत्तियों को नुकसान पहुंचा सकती है. ऐसे में एक्सपर्ट द्वारा बताए गए देसी और आसान उपाय किसानों और बागवानी प्रेमियों के लिए किसी ढाल से कम नहीं हैं.

रात में ढकाव, सुबह धूप में खुलापन जरूरी
एक्सपर्ट के अनुसार, ठंड से बचाव का सबसे सरल तरीका है रात के समय पौधों को ढकना. इसके लिए सूखी पुआल, पुराने बोरे, सूखी पत्तियां या कपड़े का इस्तेमाल किया जा सकता है. ध्यान रखें कि सुबह जैसे ही हल्की धूप निकले पौधों से कवर हटा दिया जाए ताकि नमी जमा न हो और पौधों को पर्याप्त रोशनी मिल सके. यह उपाय छोटे बगीचों और किचन गार्डन के लिए बेहद कारगर साबित होता है.

सिंचाई का सही समय बन सकता है सुरक्षा कवच
लोकल 18 से बातचीत में वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी एवं सोहावल विकासखंड प्रभारी सुधा पटेल ने बताया कि इस समय ठंड बेहद नुकसानदायक है खासकर रात में तापमान और ज्यादा गिर जाता है. ऐसे में किसान और बगिया मालिकों को नियमित सिंचाई पर ध्यान देना चाहिए. दोपहर के समय हल्की सिंचाई सबसे बेहतर मानी जाती है. उन्होंने बताया कि स्प्रिंकलर सिंचाई इस मौसम में सबसे अच्छा विकल्प है. पानी देने से मिट्टी के अंदर की नमी वाष्प बनकर ऊपर आती है जिससे तापमान संतुलित रहता है और पौधों को पाले से बचाया जा सकता है.

जैविक मल्च और देसी खाद का कमाल
एक्सपर्ट के अनुसार गोबर की खाद, राख और जैविक मल्च मिट्टी को प्राकृतिक रूप से गर्म बनाए रखते हैं. यह उपाय पौधों की जड़ों को ठंड से बचाने में मदद करता है. गोबर की खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ तापमान भी संतुलित रखती है. वहीं राख का हल्का छिड़काव पाले के असर को कम करता है. यह देसी तकनीकें कम लागत में ज्यादा फायदा देती हैं.

धुएं और मच्छरदानी करेगी पाले से बचाव
छोटी बगिया और किचन गार्डन के लिए एक और असरदार उपाय है गोबर के कंडों से हल्का धुआं करना. इन्हें मेड़ों और बॉर्डर पर रख देने से ठंडी हवा और पाले का असर कम हो जाता है. एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरीके से आग लगने की संभावना लगभग शून्य रहती है. इसके अलावा घर में पड़ी पुरानी मच्छरदानी का इस्तेमाल भी पौधों को ढकने के लिए किया जा सकता है जिससे हवा का संचार बना रहता है और ठंड का सीधा असर नहीं पड़ता. इन देसी और आसान उपायों को अपनाकर किसान और बागवानी प्रेमी ठंड के मौसम में भी अपनी बगिया को सुरक्षित रख सकते हैं.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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