Khandwa News: मध्य प्रदेश की धरती से कई बड़े संत अध्यात्मक की दुनिया में गहरी पैठा जमा चुके हैं. उनका प्रभाव विश्व के तमाम देशों पर देखने को आज भी मिल रहा है. इनमें बाबा बागेश्वर धीरेंद्र शास्त्री, प्रदीप मिश्रा, सदगुरु अवधूत दादा गुरु महाराज जैसे बड़े नाम शामिल हैं. लेकिन, अब एक बाल कथावाचक ने भी लोगों को हैरान कर दिया है. मात्र 9 साल की उम्र में बाल व्यास विष्णुप्रिया अपनी अनोखी शैली से भागवत कथा कहती हैं. उनकी वाणी में ऐसा प्रभाव है कि कथा सुनते ही श्रद्धालु भाव-विभोर हो जाते हैं. जानें इनकी दिलचस्प कहानी…
मैं संत नहीं, साधारण कथावाचक
LOCAL 18 से बातचीत में बाल व्यास विष्णुप्रिया ने कहा, वह खुद को संत नहीं मानतीं, बल्कि एक साधारण कथावाचक हैं. उनका कहना है कि ठाकुर जी की कृपा से ही वह इस मार्ग पर आगे बढ़ पा रही हैं. अगर भगवान की कृपा नहीं होती तो वह आज इस मार्ग पर नहीं होतीं. उन्होंने बताया, 7 से 8 साल की उम्र के बीच उन्होंने कथा करना शुरू किया था और उन्हें कथा वाचन से अपार आनंद मिलता है.
कक्षा 5वीं की छात्रा
विष्णुप्रिया ने बताया, उनका जन्म इंदौर में हुआ है. उनके माता-पिता उत्तर प्रदेश से हैं. उनकी माता एक फैशन डिजाइनर हैं और पिता इंजीनियर हैं. परिवार का पूरा सहयोग मिलने की वजह से वह पढ़ाई, संगीत और कथा वाचन तीनों को संतुलन के साथ आगे बढ़ा पा रही हैं. वह वर्तमान में इंदौर के एमविन अकैडमी, केट रोड में पांचवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही हैं और साथ ही म्यूजिक क्लास भी जाती हैं.
इन दिनों बाल व्यास विष्णुप्रिया की भागवत कथा खंडवा में चल रही है. उन्होंने बताया, उनका डॉक्यूमेंट्री नाम अनुधा चौबे है और उम्र कम होने की वजह से हर कथा में उनके साथ कोई न कोई गार्जियन रहता है. इस बार उनके साथ उनके पिताजी, नानाजी और नानीजी आए हैं. खंडवा के पंजाब कॉलोनी मयूर विहार में चल रही इस कथा के मुख्य यजमान सतनाम सिंह होरा और ज्योति होरा हैं. वहीं आशिष जायसवाल सहित पूरी कॉलोनी का विशेष सहयोग इस आयोजन में देखने को मिल रहा है.
समाज को संदेश देते हुए बाल व्यास विष्णुप्रिया ने कहा, आज के यंग और टीन एजर्स को भगवान को समय जरूर देना चाहिए. उन्होंने खुशी जताई कि आज बड़ी संख्या में युवा दीक्षा ले रहे हैं, मंत्र साधना कर रहे हैं और मंदिरों में भी युवाओं की भागीदारी बढ़ी है. आज का युवा भक्तिमय हो रहा है. किसी न किसी रूप में भगवान का नाम ले रहा है. यही सबसे बड़ी सकारात्मक बात है. कम उम्र में बड़ी सोच और मजबूत संस्कारों के साथ बाल व्यास विष्णुप्रिया आज समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं.