क्या वापस आ रही ‘आइकॉनिक’ बजाज पल्सर क्लासिक, जिसने हमेशा के लिए बदल दी इंडिया की ‘मोटरसाइकलिंग’

क्या वापस आ रही ‘आइकॉनिक’ बजाज पल्सर क्लासिक, जिसने हमेशा के लिए बदल दी इंडिया की ‘मोटरसाइकलिंग’


नई दिल्ली. बजाज पल्सर की कहानी 2001 में शुरू हुई थी, जब भारतीय मोटरसाइकिल बाजार में ऐसे कम्यूटर बाइक्स का दबदबा था जो लगभग पूरी तरह से माइलेज पर ही केंद्रित थीं. उस समय परफॉर्मेंस चाहने वाले शौकीनों के पास बहुत कम ऑप्शन थे और आम लोगों के लिए एक सस्ती, दमदार मोटरसाइकिल का सपना दूर की बात लगती थी. ऐसे माहौल में बजाज ने पल्सर रेंज लॉन्च कर बाजार में हलचल मचा दी. शुरुआत हुई पल्सर 150 और पल्सर 180 से. इन दोनों मॉडलों ने अपने दमदार लुक, बड़े इंजन और बोल्ड पहचान के साथ युवाओं को सीधे तौर पर अट्रैक्ट किया. पल्सर ने सिर्फ बाजार में एंट्री नहीं की, बल्कि उसे पूरी तरह बदल दिया.

149cc का एयर-कूल्ड इंजन
पहली पल्सर 150 में 149cc का एयर-कूल्ड इंजन था, जो उस समय की कम्यूटर बाइक्स से कहीं ज्यादा ताकतवर था. वहीं पल्सर 180 ने 178cc इंजन के साथ इस स्तर को और ऊपर पहुंचा दिया. आंकड़ों से आगे बढ़कर, पल्सर रेंज को खास बनाने वाली बात थी इसकी परफॉर्मेंस और सेगमेंट में पहली बार दिए गए फीचर्स जैसे फ्रंट डिस्क ब्रेक, स्पोर्टी राइडिंग पोजिशन और मस्कुलर फ्यूल टैंक, जिससे इसकी रोड पर मौजूदगी साफ नजर आती थी. ये मोटरसाइकिलें जल्दी ही युवाओं और कॉलेज स्टूडेंट्स के बीच एक सपना बन गईं.

समय के साथ बदलती पल्सर
समय के साथ पल्सर लाइनअप ने कई बदलाव देखे, लेकिन इसकी असली पहचान हमेशा बरकरार रही. 2003 में बजाज ने अपनी DTS-i (डिजिटल ट्विन स्पार्क इग्निशन) तकनीक पेश की, जिससे परफॉर्मेंस और माइलेज दोनों में सुधार हुआ और इंजन भी ज्यादा रिफाइंड हो गया. इस अपडेट के साथ नए ग्राफिक्स और छोटे-मोटे डिजाइन बदलावों ने पल्सर को परफॉर्मेंस सेगमेंट में आगे बनाए रखा. आगे चलकर पल्सर में ट्विन पायलट लैंप्स, क्लिप-ऑन हैंडलबार, गैस-चार्ज्ड रियर शॉक एब्जॉर्बर और सेमी-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर जैसे फीचर्स भी जोड़े गए, जिससे इसका लुक और प्रीमियम हो गया.

पल्सर 220 का आगाज
2000 के आखिर और 2010 के शुरुआती सालों में पल्सर एक मैच्योर मोटरबाइक बन गई, जिसमें बेहतर विश्वसनीयता, शार्प डिजाइन और ज्यादा पावर देखने को मिली. पल्सर 150 की पावर करीब 15bhp तक पहुंच गई, जबकि पल्सर 180 लगभग 17bhp तक पहुंच गई. 2007 में बजाज ने पल्सर 220 भी लॉन्च की, पहले फ्यूल-इंजेक्टेड वर्जन में और बाद में कार्ब्युरेटेड वर्जन में, ताकि कीमत कम रहे और मेंटेनेंस आसान हो.

क्लासिक पल्सर की दमदार मौजूदगी
अपने सफर के दौरान, क्लासिक पल्सर अपनी दमदार मौजूदगी, मस्कुलर लुक और शानदार परफॉर्मेंस के लिए हमेशा पसंद की जाती रही. भले ही बजाज ने बाद में NS, RS और N सीरीज जैसे नए मॉडल पेश किए, लेकिन क्लासिक पल्सर आज भी अपनी सादगी, भरोसेमंदी और उन राइडर्स के साथ भावनात्मक जुड़ाव के लिए जानी जाती है, जिन्होंने कभी इसे खरीदने का सपना देखा था. पल्सर का नाम सिर्फ एक टैंक पर लिखा बैज नहीं, बल्कि भारत में परफॉर्मेंस मोटरसाइक्लिंग का प्रतीक बन गया है.



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