घाट घोटाले का मुख्य आरोपी ही बना एडिशनल सीईओ: खंडवा में जिस जिला पंचायत में जांच चल रही, वहीं हुई पोस्टिंग; 58 लाख की रिकवरी बाकी – Khandwa News

घाट घोटाले का मुख्य आरोपी ही बना एडिशनल सीईओ:  खंडवा में जिस जिला पंचायत में जांच चल रही, वहीं हुई पोस्टिंग; 58 लाख की रिकवरी बाकी – Khandwa News



काशीराम कानूडे, एसीईओ, जिला पंचायत खंडवा।

खंडवा जिले के पुनासा जनपद के बहुचर्चित ‘घाट घोटाले’ के मुख्य आरोपी और तत्कालीन जनपद सीईओ काशीराम कानूडे की खंडवा में वापसी हो गई है। उन्हें जिला पंचायत में एडिशनल सीईओ बनाया गया है, जो सीईओ के बाद दूसरा सबसे बड़ा पद है। हैरानी की बात यह है कि जिस जिल

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मामला 2020 के कोरोना काल का है। तब पुनासा जनपद की पंचायतों में मनरेगा के तहत घाट निर्माण कराया गया था। शिकायत के बाद जांच हुई तो सामने आया कि जहां नदी-नाले और पानी तक नहीं था, वहां भी घाट बना दिए गए। इस मामले में तत्कालीन जनपद सीईओ काशीराम कानूडे, सहायक यंत्री, इंजीनियर और 62 ग्राम पंचायतों के सरपंच-सचिवों के खिलाफ गबन का मामला दर्ज किया गया था।

कानूडे पर सबसे ज्यादा 58 लाख की रिकवरी

घाट घोटाले में काशीराम कानूडे को मुख्य आरोपी मानते हुए उन पर 58 लाख 64 हजार 838 रुपए की रिकवरी निकाली गई थी। उनके अलावा बाद में सीईओ बनीं स्वर्णलता काजले पर 1.40 लाख, तत्कालीन सहायक यंत्री दिलीप कैथवास पर 18.36 लाख और इंजीनियर श्वेताली लुक पर 41.68 लाख रुपए की रिकवरी तय की गई थी।

कमिश्नर के आदेश के बाद सुस्त पड़ी जांच

एक साल पहले इंदौर संभाग के तत्कालीन कमिश्नर ने जिला पंचायत सीईओ के पुराने रिकवरी आदेश को निरस्त कर नए सिरे से पंचायतवार फोटोग्राफ और पंचनामा के साथ प्रतिवेदन बनाने को कहा था। आदेश में स्पष्ट था कि पंचायत एक्ट के तहत कार्रवाई हो। लेकिन जिम्मेदारों ने इसे एक तरह से स्टे मान लिया। नए सीईओ को गुमराह किया गया और मनरेगा शाखा के जरिए जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई।

4 महीने बाद रिटायरमेंट, लोकायुक्त ने रिश्वत लेते पकड़ा था

काशीराम कानूडे अप्रैल में रिटायर होने वाले हैं। घाट घोटाले के बाद उनका ट्रांसफर धार जिले में हो गया था। वहां उमरबन जनपद सीईओ रहते हुए 14 सितंबर 2024 को लोकायुक्त ने उन्हें 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा था। लोकायुक्त अधिकारी सुनील तालान का कहना है कि अभी चालान पेश नहीं हुआ है, इस प्रक्रिया में वक्त लगता है, इसलिए अभी निलंबन नहीं हुआ है।

मनरेगा इंचार्ज बोलीं- मैं कुछ नहीं बता सकती

इस मामले में घाट घोटाले के जांच स्टेटस को लेकर जिला पंचायत में मनरेगा शाखा की इंचार्ज किरण बारसे ने चुप्पी साध ली। उन्होंने कहा, “घाट घोटाले की जांच के बारे में मैं कुछ नहीं बोलूंगी, मैं इस विषय पर बात नहीं करना चाहती।”



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