साल में सात दिन बिकती है, मकर संक्रांति पर खाई जाती है, खरीदने को मचती है लूट, बेहद गजब मिठाई

साल में सात दिन बिकती है, मकर संक्रांति पर खाई जाती है, खरीदने को मचती है लूट, बेहद गजब मिठाई


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Makar Sankranti Special Sweets: छतरपुर के लवकुश नगर में मकर संक्रांति पर गढ़िया गुल्ला मिठाई की भारी मांग है. हर साल इस मिठाई का क्रेज यहां दिखाई देता है. ये सिर्फ सात दिन बिकती है. खरीदने की लूट मच जाती है.

Chhatarpur News:  मकर संक्रांति करीब है. ऐसे में बाजार में तमाम पारंपरिक व्यंजनों की भरमार है. वहीं, छतरपुर के बाजार में एक खास मिठाई बिक रही है, जिसके लिए लूट मची है. ये मिठाई साल में 1 दिन ही खाई जाती है. ये मिठाई मकर संक्रांति के दौरान ही बाजारों में बिकती है. इस मिठाई का इंतजार हर किसी को रहता है, इसलिए कुछ ही घंटों में क्विंटलों मिठाई बिक जाती है. इसे क्षेत्रीय भाषा में गढ़िया गुल्ला कहा जाता है.

लवकुश नगर के हाट बाजार में मिठाई बेच रहे महाराजपुर निवासी दशरथ चौरसिया बताते हैं, ये मिठाई विशेष रूप से त्योहार के लिए बनाई जाती है. साल के इसी समय में बेची जाती है. मकर संक्रांति पर्व के दिन लोग मशहूर मिठाई गढ़िया गुल्ला खाते हैं, जो इस इलाके में काफी लोकप्रिय है. अभी बाजार में इसे 60 रुपए किलो बेच रहे हैं. मांग के अनुसार भाव इससे कम या ज्यादा भी हो सकता है.

कुछ ही घंटों में 2 क्विंटल साफ
दशरथ बताते हैं कि मैंने लवकुश नगर के बाजार में अभी तक दो क्विंटल गढ़िया गुल्ला बेच लिया है. मैं 2 क्विंटल लाया था और वह सारा बिक गया. दशरथ बताते हैं कि गढ़िया गुल्ला मुख्य रूप से शक्कर से ही बनाई जाती है. इस मिठाई को हाथी और घोड़ा जैसे खिलौने का आकार देकर बनाया जाता है.

कुछ ही दिन के लिए बाजार में 
गढ़िया गुल्ला लगभग 7 दिन तक ही बाजारों में बिकती है. इसके बाद यह मिठाई बाजारों से गायब हो जाती है. मिठाई की दुकानों पर भी कम ही दिखाई देती है. बुंदेलखंड क्षेत्र में इस मिठाई की परंपरा सालों से चली आ रही है. अगर मकर संक्रांति पर कोई अपने रिश्तेदार के यहां जाता है तो भी इस मिठाई को लेकर जाता है.

बसंत पंचमी पर भी खाते हैं…
मकर संक्रांति पर्व के पहले घरों में तिल के लड्डू के साथ बेसन के खुरमी और भी व्यंजन बनाए जाते हैं. फिर मकर संक्रांति के दिन स्नान करने के बाद गढ़िया गुल्ला खाया जाता है. पूजा के दौरान कई व्यंजनों के साथ गढ़िया गुल्ला को इसी दिन कपड़े में बांधकर रख लिया जाता है. फिर इसे बसंत पंचमी की पूजा होने के बाद खोला जाता है और प्रसाद स्वरूप खाया जाता है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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