तालाबों में पड़ी प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाओं के सही विसर्जन को लेकर सकारात्मक ग्रुप ने वैज्ञानिक समाधान की पहल की है। वैज्ञानिक पद्धति से इनका विसर्जन शुरू किया गया है, जिससे ये पूरी तरह घुल जाएं और जलस्रोत या मिट्टी को भी नुकसान नहीं पहुंचाएं।
.
संस्था की अनीता शर्मा ने बताया कि रविवार से तालाबों से ऐसी पीओपी की प्रतिमाएं जुटानी शुरू की गई हैं। पहले दिन 15 से अधिक प्रतिमाओं का वैज्ञानिक पद्धति से विसर्जन किया गया। उन्होंने बताया कि हम पीओपी की प्रतिमाओं को पिछले करीब 7 सालों से तालाबों से निकालते रहे हैं। लेकिन, अब तक इन्हें मंदिरों की अनुमति से मंदिर की मिट्टी में दबा देते रहे हैं।
इससे मिट्टी में केमिकल जाते हैं। वैज्ञानिक पद्धति से विसर्जन से मिट्टी भी प्रदूषित नहीं होगी। इसके लिए उन्होंने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक डॉ. योगेंद्र सक्सेना की मदद ली और पूरी प्रक्रिया समझी।
इस अभियान में समाजसेवी मम्तेश शर्मा, अनिता शर्मा, रेखा शर्मा, सोनाली, श्रद्धा, लता, पूजा, पंकजा, किरण, पूर्णिमा और मीनू सक्रिय रूप से शामिल हैं। समूह का कहना है कि आने वाले समय में इस वैज्ञानिक विधि की ट्रेनिंग और अधिक लोगों को दी जाएगी, ताकि भोपाल के तालाब भविष्य में आस्था के साथ-साथ स्वच्छता की पहचान बन सकें।
ऐसे आप भी कर सकते हैं
- पीओपी मूर्ति के वजन के बराबर अमोनियम बाइकार्बोनेट लें।
- इसे पर्याप्त पानी में घोलें।
- इस घोल को फाउंटेन या स्प्रे से मूर्ति पर धीरे-धीरे डालें।
- रासायनिक प्रक्रिया में पीओपी कैल्शियम कार्बोनेट और अमोनियम सल्फेट में बदल जाता है। { कैल्शियम कार्बोनेट से चॉक बनाई जा सकती है।
- अमोनियम सल्फेट को 50% पानी में मिलाकर पौधों में डाला जा सकता है, यह अच्छा उर्वरक है।