गन्ना किसानों के लिए अलर्ट! बुआई से पहले नहीं किया ये काम तो सड़ जाएगी फसल

गन्ना किसानों के लिए अलर्ट! बुआई से पहले नहीं किया ये काम तो सड़ जाएगी फसल


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Agri tips: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लाल सड़न रोग गन्ना की एक गंभीर बीमारी है. यह रोग फफूंद के कारण फैलता है और गन्ने के अंदर से सड़न शुरू कर देता है. बाहर से पौधा हरा दिखाई देता है, लेकिन अंदर का गूदा लाल होकर सड़ने लगता है. इस रोग की चपेट में आने से गन्ने की बढ़वार रुक जाती है और रस की मात्रा भी काफी कम हो जाती है.

खरगोन :  मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में अब किसान भाई गन्ना की खेती से बेहतर आमदनी कमा रहे हैं. सिंचाई सुविधाएं बेहतर होने और क्षेत्र में चीनी मिलों के होने के कारण गन्ना क्षेत्र की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल हो चुका है. इन दिनों बसंत कालीन गन्ना की बुआई का समय चल रहा है और किसान खेतों की तैयारी में जुटे हुए हैं. लेकिन गन्ना उत्पादन में सबसे बड़ी परेशानी लाल सड़न रोग को माना जाता है, जो समय पर नियंत्रण नहीं होने पर पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लाल सड़न रोग गन्ना की एक गंभीर बीमारी है. यह रोग फफूंद के कारण फैलता है और गन्ने के अंदर से सड़न शुरू कर देता है. बाहर से पौधा हरा दिखाई देता है, लेकिन अंदर का गूदा लाल होकर सड़ने लगता है. इस रोग की चपेट में आने से गन्ने की बढ़वार रुक जाती है और रस की मात्रा भी काफी कम हो जाती है. कई मामलों में पूरा खेत ही खराब हो जाता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.

कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजीव सिंह बताते हैं कि लाल सड़न रोग से बचाव के लिए सबसे जरूरी है शुरुआती सावधानी. उनका कहना है कि अगर किसान बुआई से पहले सही तरीके से उपचार कर लें, तो बाद में दवाइयों पर खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती. यह रोग एक बार खेत में फैल जाए तो रासायनिक दवाइयों से भी पूरी तरह खत्म नहीं होता, इसलिए रोकथाम ही सबसे अच्छा उपाय है.

रेड रॉट से बचाव के उपाय
डॉ. सिंह के अनुसार लाल सड़न रोग से बचाव का सबसे कारगर तरीका बीजोपचार है. गन्ना बोने से पहले बीज के रूप में उपयोग किए जाने वाले टुकड़ों को उपचारित करना चाहिए. बीजोपचार से रोग के कारक फफूंद नष्ट हो जाते हैं और खेत में बीमारी फैलने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है. साथ ही इससे गन्ने की शुरुआती बढ़वार भी अच्छी होती है.

कैसे करें गन्ना का बीजोपचार
बीजोपचार के लिए ट्राइकोडर्मा हर्जिनियम का उपयोग किया जा सकता है. यह एक जैविक फफूंदनाशी है, जो गन्ना सहित कई फसलों में रोगों से बचाव करता है. कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि ट्राइकोडर्मा हर्जिनियम को 10 किलोग्राम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से इस्तेमाल करना चाहिए. इसके लिए गन्ने के बीज टुकड़ों को इस घोल में अच्छी तरह उपचारित किया जाता है, ताकि दवा पूरे बीज पर समान रूप से लग सके.

स्वस्थ्य बीज का चयन जरूरी
बीजोपचार के बाद गन्ने के टुकड़ों को छांव में सुखाना जरूरी होता है. इसके बाद ही खेत में बुआई करनी चाहिए. इससे जैविक फफूंदनाशी की प्रभावशीलता बनी रहती है और बीज सुरक्षित रहता है. ट्राइकोडर्मा हर्जिनियम लाल सड़न यानी रेड रॉट के साथ ही अन्य मिट्टी जनित रोगों को भी नियंत्रित करता है. विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि लाल सड़न रोग से बचाव के लिए स्वस्थ और रोगमुक्त बीज का चयन बेहद जरूरी है. पुराने और संक्रमित बीज से हमेशा बचना चाहिए.

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Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें

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