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Naikahai war: नैकहाई की रणभूमि में मराठा दुश्मन सेना से लोहा लेते हुए रीवा रियासत के कई योद्धा भी शहीद हुए थे. इनकी याद में रियासत के महराजा और महारानी ने नैकहाई के युद्ध स्थल पर उनकी छतरियां बनवाई थी. इसके अलावा एक छतरी मराठा सेनापति की भी बनवाई गई थी. जिसका धड़ उसी युद्ध स्थल पर छतरी के नीचे दफन किया गया था.
The untold story of the Naikahai war: नैकहाई की रणभूमि में मराठा सेना से लड़ते हुए रीवा रियासत के कई योद्धा शहीद हुए थे. उनकी याद में रियासत के महाराजा और महारानी ने नैकहाई के युद्ध स्थल पर उनकी छतरियां बनवाई थी. इसके अलावा एक छतरी मराठा सेनापति की भी बनवाई गई थी. जिसका धड़ उसी स्थान पर दफन किया गया था जबकि सिर रीवा के उपरहटी स्थित किला में मुख्य दरवाजे के नीचे दबाया गया था.
रीवा के इतिहासकार असद खान के अनुसार आज से 227 वर्ष पहले वर्ष 1796 में मराठा राजा अली बहादुर जो बाजीराव पेशवा और मस्तानी का पोता था ने 10 हजार सैनिकों के साथ रीवा पर आक्रमण कर दिया. मराठा सेना ने रीवा शहर के चोरहटा तक पहुंच बना ली थी. इस दौरान रीवा नरेश अजीत सिंह ने युद्ध न कर पाने की विवशता जाहिर की. तब रीवा की महारानी कुंदन कुमारी ने अपने सैनिकों और अन्य योद्धाओं को मराठा सेना से लड़ने का संदेश भेजा.
महारानी ने योद्धाओं को चूड़ी और पान का बीड़ा भी भेजा, ताकि जो युद्ध के लिए तैयार हों, वे पान का बीड़ा ग्रहण करें और जो नहीं, वे चूड़ियां पहन लें. इसके बाद रीवा के योद्धाओं ने पान का बीड़ा ग्रहण किया और युद्ध की तैयारी की. नैकहाई के रणभूमि में मात्र 200 सैनिकों ने मराठा सेना का सामना किया और महारानी कुंदन कुमारी के नेतृत्व में वीरता से लड़ा.
करीब 300 साल पहले रीवा रियासत में राजा अजीत सिंह का शासन था. वर्ष 1758 में उनका विवाह महारानी कुंदन कुमारी से हुआ था. वर्ष 1796 में राज्य में उथल-पुथल की स्थिति बनी हुई थी. सीमावर्ती लड़ाइयों के कारण महाराजा अजीत सिंह की सैन्य शक्ति कमजोर हो गई थी और आर्थिक स्थिति भी खराब हो गई थी. इसी दौरान मराठा राजा अली बहादुर ने टैक्स की मांग की जिसे राजा अजीत सिंह ने अस्वीकार कर दिया. इसके बाद, मराठा राजा ने रीवा पर आक्रमण करने का आदेश दिया.
मराठा सेनापति रीवा पहुंचा और इस खबर से रानी कुंदन कुमारी ने सूझबूझ से काम लिया. उन्होंने महाराज को मराठा नायक के किसी भी प्रस्ताव को मानने से रोका. रानी ने वीरों को संदेश भेजा कि वे युद्ध के लिए पान का बीड़ा उठाएं या चूड़ियां पहनकर घर बैठें. इस चुनौतीपूर्ण संदेश ने वीरों में जोश भर दिया और उन्होंने पान का बीड़ा उठाकर युद्ध के लिए तैयार हो गए.
रीवा की महारानी ने अपने 200 वीर योद्धाओं के साथ मिलकर मराठा सेना का सामना किया और कई मराठा सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया. रणभूमि में महारानी कुंदन कुमारी ने मराठा सेनापति का सर धड़ से अलग कर दिया. बाकी मराठा सैनिक मैदान छोड़कर भाग गए और रीवा महारानी ने नैकहाई का युद्ध जीत लिया.
1796 में रीवा की महारानी कुंदन कुमारी के नेतृत्व में 200 योद्धाओं ने 10 हजार मराठा सैनिकों से भीषण युद्ध लड़ा और उन्हें खदेड़ दिया. रणभूमि में शहीद हुए वीरों की याद में छतरियां बनाई गई, लेकिन समय के साथ यह ऐतिहासिक स्थल उपेक्षित होकर वीरान हो गया और छतरियां टूटकर गिरने लगी. शासन और प्रशासन की अनदेखी के चलते यह स्थल अब विरान है.