Makar Sankranti kab hai: अक्सर मकर संक्रांति 14 जनवरी को है या 15 जनवरी को इस बात पर विद्वानों में मतभेद होता था, लेकिन इस बार 14 तारीख को एकादशी पड़ने से एक और कन्फ्यूजन पैदा हो गया है. खिचड़ी और दाल-चावल के दान और इसके पारण के इस सबसे बड़े पर्व पर चावल का दान करें या न करें और चावल से बनी खिचड़ी का प्रसाद बनवाएं या न बनवाएं, इसे लेकर कन्फ्यूजन पैदा हो गया है. जहां कुछ लोग मकर संक्रांति को साल का सबसे बड़ा त्यौहार मानते हुए इस दिन खिचड़ी दान करने और खाने की सलाह दे रहे हैं, वहीं कुछ लोग एकादशी के चलते इसे निषेध मान रहे हैं. हालांकि वैदिक नियमों और ज्योतिष से जुड़े पंडित और वास्तुविद इसे लेकर क्या कहते हैं, आइए जान लेते हैं.
एकादशी के दिन चावल का दान कर सकते हैं?
14 को ही मकर संक्रांति मना रहे हैं तो इस दिन एकादशी भले ही है लेकिन चावलों का दान आप कर सकते हैं. इस दिन खिचड़ी का विशेष महात्म्य माना जाता है और चावल तो ब्रह्म अन्न है इस दिन चावल, दाल, गुड़-तिल का दान आपके लिए फलदायी रहता है.
क्या इस दिन खा सकते हैं खिचड़ी?
दुर्गेश तारे कहते हैं कि अगर 15 जनवरी को संक्रांति मना रहे हैं तो उस दिन द्वादशी और एकादशी के बाद इस दिन चावल पकाना और खाना विशेष फलदायक रहता है, इसलिए भी आप गुरुवार को संक्रांति मनाएं तो और भी बेहतर है, लेकिन अगर 14 को ही पर्व मना रहे हैं तो इस दिन आप खिचड़ी या चावल का न तो भोग लगाएं और न ही प्रसाद पाएं. एकादशी के दिन चावल खाना निषेध है, इसलिए इस दिन कोशिश करें कि व्रत या उपवास रखें और फलाहार लें. अगले दिन पारण करके अन्न ग्रहण करें.
इस दिन चावल, दाल, तिल, गुड़, गजक, मूंगफली, पहनने-ओढ़ने के वस्त्र, रुपये, बर्तन आदि दान कर सकते हैं. सनातन धर्म में मकर संक्रांति को दान के लिए सबसे उत्तम दिन माना जाता है. इसलिए इस दिन किया गया दान कई गुना ज्यादा पुण्यदायी और फलदायी होता है.