आजादी के बाद से अब तक नहीं बन सका श्मशान घाट, खुले में दाह संस्कार करना मजबूरी

आजादी के बाद से अब तक नहीं बन सका श्मशान घाट, खुले में दाह संस्कार करना मजबूरी


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आजादी के बाद से अब तक नहीं बन सका श्मशान घाट, खुले में दाह संस्कार करना मजबूरी

 

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रिपोर्ट- प्रदीप चौहान. मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की इछावर तहसील के कटारिया बांका गांव में आजादी के बाद से आज तक श्मशान घाट नहीं होने से ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से मोहताज हैं. हालत इतनी दयनीय है कि ग्रामीणों को खुली जमीन में अंतिम संस्कार करना मजबूरी बन गया है. हैरानी की बात यह है कि गांव में 75 डिसमिल भूमि श्मशान घाट के लिए आरक्षित है लेकिन भर्राशाही के चलते इस रिमोट एरिया वाले गांव में अभी तक श्मशान घाट नहीं होने से विकास की कड़वी हकीकत सामने आई है. इस गांव में एक ग्रामीण की मौत के बाद यह समस्या फिर सामने आई. अंतिम संस्कार खुले में करना पड़ा. कुछ ग्रामीण मजबूरी में अपने खेतों में ही परिवार के मृतकों का अंतिम संस्कार करते हैं. मूलभूत सुविधाओं से मोहताज ग्रामीणों की यह तस्वीर अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है.

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