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Bamboo Farming Benefits: बांस की खेती किसानों के लिए कम लागत में लंबे समय तक आमदनी देने वाला विकल्प बन रही है. मेढ़ों पर लगाया गया बांस खेत की सुरक्षा के साथ आर्थिक मजबूती भी देता है. 4-5 साल में कटाई शुरू होकर 40 साल तक उत्पादन संभव है. सरकारी सब्सिडी और मजबूत बाजार मांग से जोखिम बेहद कम हो जाता है. अगर आप खेती में स्थायी और भरोसेमंद कमाई चाहते हैं, तो बांस आपके लिए बेस्ट चॉइस है.
शिवांक द्विविद, सतना: खेती में बढ़ती लागत और फसलों के अनिश्चित दामों के बीच किसान अब ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जो कम खर्च में लंबे समय तक भरोसेमंद आमदनी दे सके. इसी कड़ी में बांस की खेती किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है. खेत की मेढ़ों पर लगाया जाने वाला बांस न केवल खेत की स्थायी बाउंड्री तैयार करता है बल्कि आने वाले वर्षों में मजबूत आर्थिक सहारा भी बनता है. जन्म से लेकर मृत्यु तक हर संस्कार और रोजमर्रा के उपयोग में शामिल बांस की मांग ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लगातार बनी रहती है जिससे इसकी खेती किसानों के लिए जोखिम से कम और लाभ से भरपूर मानी जा रही है.
ठंड का मौसम क्यों है बांस लगाने के लिए सबसे बेहतर
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बांस लगाने के लिए ठंड का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस मौसम में कीट-पतंग और दीमक का प्रकोप कम होता है जिससे पौधों को शुरुआती बढ़वार के लिए अनुकूल माहौल मिलता है. खेती विशेषज्ञ विष्णु तिवारी लोकल 18 से बताते हैं कि रबी फसलों के दौरान खेत की मेढ़ों पर बांस के राइजोम लगाने से अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी पड़ती. किसान जिस तरह अपनी मुख्य फसल की सिंचाई और देखभाल करता है उसी के साथ बांस के पौधों की भी देखरेख हो जाती है जिससे पानी और मजदूरी दोनों की बचत होती है.
कम लागत, कम देखभाल और ज्यादा फायदा
बांस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बहुत उपजाऊ मिट्टी की जरूरत नहीं होती न तो ज्यादा सिंचाई चाहिए और न ही भारी मात्रा में रासायनिक खाद. साधारण खाद और समय-समय पर निराई-गुड़ाई से बांस अच्छे से पनप जाता है. खेत की मेढ़ों के अलावा किसान अपने खेत की खाली जगहों में भी बांस लगा सकते हैं. प्रत्येक पौधे के लिए गड्ढा खोदकर राइजोम ट्रांसप्लांट किया जाता है. शुरुआती वर्षों में खरपतवार नियंत्रण जरूरी होता है ताकि युवा पौधों के साथ प्रतिस्पर्धा कम रहे.
पांच साल में मजबूत बाउंड्री, 40 साल तक उत्पादन
विशेषज्ञों के मुताबिक एक एकड़ खेत की मेढ़ों पर सही दूरी लगभग 4×4 मीटर पर बांस लगाने से चार से पांच साल में अच्छी पैदावार मिलने लगती है. अनुमान के अनुसार 20 से 60 टन प्रति एकड़ तक उत्पादन संभव है जो कई दशकों तक लगातार जारी रह सकता है. बांस की पहली कटाई 4-5 साल बाद शुरू हो जाती है जिसमें प्रति गुच्छे से 3-5 मजबूत बांस प्राप्त हो सकते हैं. एक बार स्थापित होने के बाद बांस 40 साल या उससे अधिक समय तक उत्पादन देता है जिससे यह दीर्घकालीन निवेश जैसा बन जाता है.
सही किस्म और सरकारी सहायता से बढ़ेगा मुनाफा
बांस की खेती में सही किस्म का चयन भी अहम भूमिका निभाता है. बम्बूसा बालकोआ और बम्बूसा तुल्दा जैसी किस्में व्यावसायिक रूप से ज्यादा लाभकारी मानी जाती हैं. इसके साथ ही राष्ट्रीय बांस मिशन जैसी सरकारी योजनाओं के तहत किसानों को 50% सब्सिडी भी मिलती है जिससे शुरुआती लागत और जोखिम दोनों कम हो जाते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि बांस की खेती अपनाकर किसान न केवल अपनी जमीन की सुरक्षा कर सकते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी और भरोसेमंद आय का मजबूत आधार भी तैयार कर सकते हैं.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें