Last Updated:
Rewa news: अस्सी के दशक के शुरुआत से ही शादी समारोह हो या फिर अन्य कार्यक्रम बैंड बाजा के बिना अधूरे लगते थे. बदलते दौर के साथ शहर के साथ साथ ग्रामीण अंचलों में भी बैंड बाजा की जगह धीरे धीरे डीजे ने ले ली है. बैंड बाजा को अपने जहन से अभी तक कोई नहीं भुला पाया है. शौकीन आज भी बैंड बाजा में ही थिरकना पसंद करते हैं.
रीवाः मौजूदा समय में भले ही डीजे की धुन पर डांस करने का चलन बन गया है, लेकिज बैंड बाजे की बात ही अलग है. गांवों में आज भी छोटी छोटी खुशियों के मौके पर लोग बैंडवाले को ही बुलाते हैं और उसके बाजे की धुन पर नाचते हैं. अस्सी के दशक के शुरुआत से ही शादी समारोह हो या फिर अन्य कार्यक्रम बैंड बाजा के बिना अधूरे लगते थे. बदलते दौर के साथ शहर के साथ साथ ग्रामीण अंचलों में भी बैंड बाजा की जगह धीरे धीरे डीजे ने ले ली है.
बैंड बाजा की धुन पर थिरकते हैं लोग
शादी का जश्न अब डीजे की धुन के साथ मनाया जाने लगा है. लेकिन बैंड बाजा का भी बारात में अपना एक विशेष महत्व होता है. शादी बारात में ऐसे कई कार्यक्रम होते हैं जिसमें घर के सदस्य बैंड बाजा के सामने ही अपनी खुशी का इजहार करते हैं. घर के सभी सदस्य यहां तक की महिलाएं इन्हीं बैंडबाजा की धुन में नृत्य करती है. शादी से जुड़े हुए मेंहदी, हल्दी, बारात सत्कार, अंजुरी जैसे कार्यक्रमों में बैंड बाजा के कलाकार अपनी विशेष प्रस्तुति देते है. घर के सदस्य डीजे की धुन को छोड़कर बैंड बाजा की धुन में थिरकने लगते है. रीवा के धोबिया टंकी स्थित राजा बैंड बाजा ने कहा कि धीरे-धीरे बैंड बाजा कि कला खत्म हो रही है. अभी भी बघेलखंड में इस कला को संजो कर रखा गया है.
बैंड बाजा के धुन पर बजते थे 90 के गाने
प्रोफेशनल्स बैंड बाजा वाले भी तैयार हो रहे हैं. उनके द्वारा अच्छा काम किया जा रहा है. हालांकि अब बैंड बाजा के बजाय डीजे की ज्यादा डिमांड है. शौकीन लोग अभी भी डीजे के साथ-साथ बैंड बाजा भी बुलवाते हैं. बैंड बाजा में थिरकना भी पसंद करते हैं. शादी बारात में अभी भी बैंड बाजा को काफी पसंद किया जाता है. पहले का दौरा अलग ही था लोग बताते हैं कि पहले अगर शादी में बैंड बाजा नहीं बुलाया गया तो वह शादी फीकी मानी जाती थी. क्योंकि यही बैंड बाजा 80 और 90 के दशक से शादी समारोह में चार चांद लगाने लगे थे. लोग बताते हैं कि आज भी उन्हे वो दिन याद है जब लोग बैंड बाजा की धुन पर नागिन का डांस किया करते थे. बैंडबाज के कलाकार अलग-अलग गाने की धुन पर बैंड बाजा की प्रस्तुति देते है. बैंड बाजा के साथ-साथ झुनझुना, बैंजो, लाउड स्पीकर लगाकर बैंडबाजा के कलाकार अलग अंदाज में प्रस्तुति दिया करते है.
खत्म हो रहा है चलन
रीवा के रानी तालाब स्थित शिवम बैंड एवं बैंड पार्टी के संचालक प्रीतम वंशल ने कहा कि धीरे-धीरे बैंड बाजा कि कला खत्म हो रही है. अभी भी बघेलखंड में इस कला को संजो कर रखा गया है. प्रोफेशनल्स बैंड बाजा वाले भी तैयार हो रहे हैं. उनके द्वारा अच्छा काम किया जा रहा है. हालांकि अब बैंड बाजा के बजाय डीजे की ज्यादा डिमांड है. शौकीन लोग अभी भी डीजे के साथ-साथ बैंड बाजा भी बुलवाते हैं. बैंड बाजा में थिरकना भी पसंद करते हैं.
About the Author
मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें