बुरहानपुर के चेनपुरा में आदिवासी सांस्कृतिक महासम्मेलन शुरू: चार राज्यों से जुटे समाजजन, संस्कृति संरक्षण और प्रकृति बचाने का संदेश – Burhanpur (MP) News

बुरहानपुर के चेनपुरा में आदिवासी सांस्कृतिक महासम्मेलन शुरू:  चार राज्यों से जुटे समाजजन, संस्कृति संरक्षण और प्रकृति बचाने का संदेश – Burhanpur (MP) News



बुरहानपुर जिले के नेपानगर क्षेत्र स्थित ग्राम चेनपुरा में आज (मंगलवार) से 33वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन शुरू हो गया। इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात सहित विभिन्न राज्यों से आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए

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आयोजन स्थल पर आदिवासी वेशभूषा, पारंपरिक हथियार जैसे भाला, गुप्ती, फाल्या, दराती, हसिया, तीर-कमान और लाठी के स्टॉल लगाए गए। पापड़ से लेकर पिज्जा तक की विभिन्न खाद्य वस्तुएं भी आकर्षण का केंद्र रहीं। समाज के लोग ड्यूक और केटीएम जैसी मोटरसाइकिलों से लेकर मर्सिडीज जैसी कारों तक से यहां पहुंचे।

आयोजन समिति के अध्यक्ष बिलर सिंह जमरा ने बताया कि आदिवासी समाज ‘जंगल, पहाड़, नदी बचाओ’ के सिद्धांत पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी परंपरा के माध्यम से दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि आदिवासी प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीवन यापन करते हैं। वे प्रकृति से कुछ लेते हैं तो कुछ देते भी हैं; जैसे खेती करते समय खेत के चारों ओर पेड़ लगाते हैं और संसाधनों का अनावश्यक दोहन नहीं करते।

पहले दिन प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ राष्ट्रीय महासचिव अशोक चौधरी ने बताया कि यह सम्मेलन संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। पहले दिन प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ, जिसके बाद साहित्य सम्मेलन, युवा सम्मेलन और महिला सम्मेलन हुए।

कल (14 जनवरी) भी विभिन्न आयोजनों की योजना है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य भी इस सम्मेलन में शामिल होंगे। इस दिन एक भव्य सांस्कृतिक महारैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आदिवासी समाज के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य, ढोल, मांदल और लोकगीतों के साथ अपनी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद पारंपरिक नृत्य, गीत, नाट्य प्रस्तुतियां और लोककलाओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जो आदिवासी संस्कृति के उत्सव और गौरव का प्रतीक बनेगा।

महासम्मेलन के तीसरे और अंतिम दिन शुक्रवार को संगठन सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में समाज की एकता, शिक्षा, सामाजिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। विभिन्न प्रस्तावों पर मंथन के बाद महासम्मेलन का औपचारिक समापन होगा।



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