रीवा के तीन हनुमान मंदिर, जहां हनुमानजी करते हैं न्याय, लगती है आस्था की अदालत

रीवा के तीन हनुमान मंदिर, जहां हनुमानजी करते हैं न्याय, लगती है आस्था की अदालत


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Three Hanuman Temples of Rewa: चिरौल दास बाबा के बारे में मान्यता है कि वे पानी के ऊपर पैदल चलकर तालाब पार करते थे. चिरहुला मंदिर के पुजारी बालकदास महराज ने बताया कि अधिकांश भक्तों की मनोकामना जिला न्यायालय में ही पूरी हो जाती है और हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में बहुत कम अर्जियां जाती है. यही कारण है कि सबसे ज्यादा भीड़ चिरहुला मंदिर में होती है. रीवा के बिछिया स्थित अखाड़ घाट में तीन महात्मा रहते थे. जिनका नाम चिरौल दास रामदास और खेमदास था. तीनों महात्मा ने लगभग 500 वर्ष पहले जंगल में मूर्ति और तालाब की स्थापना की.

राम भक्त हनुमान जी वे देवता हैं जो अमर हैं. धरती पर जितने भी अवतार हुए हैं उनमें से हनुमान जी, दत्तात्रेय और परशुराम ही अमर हैं. हनुमान जी को कलयुग का देवता भी कहा जाता है. कहा जाता है कि बजरंग बलि अपने भक्तों की मुराद जल्दी सुनते हैं, इसलिए करोड़ों लोग उनकी पूजा करते हैं. वैसे तो बजरंग बली के सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. लेकिन रीवा शहर के तीन ऐसे हनुमान मंदिर हैं. जहां उनकी पूजा न्यायाधीश के रूप में की जाती है. इन मंदिरों में भगवान बजरंगबली की इतनी आस्था है कि हर मंगलवार और शनिवार को हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़ यहां लगती है. ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान की अदालत लगती है. हनुमानजी खुद यहां न्याय करते है.

चिरहुला मंदिर को हनुमानजी की जिला अदालत कहा जाता है. वहीं, रामसागर हनुमानजी के मंदिर को हाईकोर्ट कहा जाता है. इस मंदिर से जैसे ही आगे बढ़ेंगे, खेमसागर हनुमानजी के मंदिर को सुप्रीम कोर्ट कहा जाता है. कहा जाता है कि जिन भक्तों के कष्टों का निवारण जिला न्यायालय से नहीं होता उनकी सुनवाई हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में होती है. मान्यताओं के अनुसार यहां आने वाले हर श्रद्धालु की पीड़ा दूर हो जाती है. यह तीनों मंदिर एक ही दिशा में स्थित है. चिरहुला मंदिर में जब भी किसी भक्त की मुराद पूरी होती है तो वह रामचरित मानस का पाठ और भंडारा कराते है.

ऐसी मान्यता है कि इन मंदिरों की स्थापना आज से 500 वर्ष पूर्व चिरौल दास बाबा ने की थी. जिनके नाम से चिरहुला मंदिर विख्यात है. तीनों मंदिर एक ही दिशा में स्थापित किए गए थे. चिरहुला मंदिर तालाब के किनारे स्थित है जबकि राम सागर मंदिर और खेम सागर मंदिर क्रमशः तालाब के ऊपर और अंदर स्थित है. शहर के ये तीनों मंदिर काफी चर्चित हैं. इसीलिए सुबह से शाम तक भक्तों का तांता लगा रहता है.

चिरौल दास बाबा के बारे में मान्यता है कि वे पानी के ऊपर पैदल चलकर तालाब पार करते थे. चिरहुला मंदिर के पुजारी बालकदास महराज ने बताया कि अधिकांश भक्तों की मनोकामना जिला न्यायालय में ही पूरी हो जाती है और हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में बहुत कम अर्जियां जाती है. यही कारण है कि सबसे ज्यादा भीड़ चिरहुला मंदिर में होती है. रीवा के बिछिया स्थित अखाड़ घाट में तीन महात्मा रहते थे. जिनका नाम चिरौल दास रामदास और खेमदास था. तीनों महात्मा ने लगभग 500 वर्ष पहले जंगल में मूर्ति और तालाब की स्थापना की.

पुजारी ने बताया कि यह मूर्ति राम भक्त हनुमानजी की थी. धीरे-धीरे यहां भक्तों का आना शुरू हुआ. लगभग 50 वर्षों बाद मंदिर का निर्माण शुरू हुआ और 50 वर्ष मंदिर को बनने में लग गए. आज यह क्षेत्र नगर निगम के अंतर्गत आता है और यहां की आबादी भी कई गुना बढ़ गई है. शहर के सबसे पास चिरहुला मंदिर है. जिसकी स्थापना चिरौल दास महराज ने की थी. इस मंदिर में ज्यादातर भक्त अपनी समस्याओं को लेकर चिरहुला स्थित हनुमानजी के दरबार में पहुंचने लगे. इसलिए इस मंदिर को भक्तों द्वारा जिला न्यायालय के रूप में पूजा जाता है.

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