सेसई वालों का समोसा: स्वाद ऐसा कि जिले नहीं, संभागों से खिंचे चले आते हैं लोग

सेसई वालों का समोसा: स्वाद ऐसा कि जिले नहीं, संभागों से खिंचे चले आते हैं लोग


अगर स्वाद की कोई पहचान होती, तो उसका पता शायद सेसई वालों का समोसा ही होता. मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के झांसी तिराहा इलाके में मौजूद यह छोटी-सी दुकान आज सिर्फ एक नाश्ते की जगह नहीं, बल्कि लोगों के लिए एक फूड डेस्टिनेशन बन चुकी है. हालात ऐसे हैं कि यहां समोसा, बेड़ई और मावा की गुजिया खाने के लिए लोग जिले नहीं, बल्कि आसपास के संभागों से खिंचे चले आते हैं.

सुबह होते ही लग जाती है भीड़

सुबह के वक्त जैसे ही दुकान खुलती है, वैसे ही ग्राहकों की लाइन लगना शुरू हो जाती है. कोलारस, बदरवास, पोहरी, बैराड़, करेरा और पिछोर जैसे इलाकों से लोग खासतौर पर यहां नाश्ता करने पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों की मानें तो “सेसई वालों के यहां नाश्ता किए बिना पेट भरता ही नहीं.” दोपहर तक भीड़ बनी रहती है और कई बार तो सामान खत्म होने से पहले ही दुकान बंद करनी पड़ जाती है.

50 किलोमीटर दूर से सिर्फ स्वाद के लिए

करेरा तहसील से करीब 50 किलोमीटर का सफर तय कर शिवपुरी पहुंची प्रीति अहिरवार बताती हैं कि वे किसी निजी काम से शहर आई थीं. घरवालों ने साफ कह दिया था कि अगर शिवपुरी जा रही हो, तो सेसई वालों का समोसा जरूर खाना. प्रीति कहती हैं कि मैंने सोचा था ठीक-ठाक होगा, लेकिन स्वाद उम्मीद से कहीं ज्यादा निकला. अब समझ आया लोग इतना क्यों तारीफ करते हैं. इतना ही नहीं, उनके परिवार के लोग कई बार यहां से नाश्ता पैक कराकर करेरा तक ले जाते हैं.

तीन साल से वही स्वाद, वही भरोसा

नियमित ग्राहक बंटी सक्सेना बताते हैं कि वे पिछले तीन साल से लगातार यहीं नाश्ता कर रहे हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि स्वाद कभी बदला नहीं. तीन साल पहले जैसा था, आज भी वैसा ही है. शायद इसी वजह से अब इसकी पहचान भोपाल और इंदौर तक बन गई है,” बंटी कहते हैं. वे बताते हैं कि कई लोग बसों के जरिए यहां से नाश्ता पार्सल कराकर बड़े शहरों तक ले जाते हैं.

₹20 में भरपेट नाश्ता, चटनी तो कमाल

आज जब हर चीज महंगी होती जा रही है, वहां सेसई वालों का नाश्ता अब भी आम आदमी की पहुंच में है. ग्राहक आमिर खान बताते हैं कि ₹20 में इतना नाश्ता मिल जाता है कि चार बड़े भी एक आदमी का पेट भर दें. ऊपर से सब्जी और चटनी बस पूछिए मत. यहां की खास चटनी का स्वाद ऐसा है कि लोग उसे आज भी याद करते हैं.

2017 से स्वाद और साफ-सफाई ही पहचान

मनोज कॉर्नर के संचालक सागर बताते हैं कि वे मूल रूप से सेसई गांव के रहने वाले हैं और 2017 से दुकान चला रहे हैं. हमने शुरू से तय किया था कि स्वाद और साफ-सफाई से कोई समझौता नहीं करेंगे. सागर मुस्कुराते हुए कहते हैं कि शायद यही वजह है कि लोग दूर-दूर से यहां आते हैं.

शिवपुरी की पहचान बनता स्वाद

आज सेसई वालों का समोसा सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि शिवपुरी की पहचान बनता जा रहा है. स्वाद, किफायती दाम, साफ-सफाई और अपनापन इन सबने मिलकर इसे खास बना दिया है. जो एक बार यहां खा ले, वह दोबारा आने का बहाना जरूर ढूंढता है.



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