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Ajab Gajab: माता के प्रति आस्था ऐसी कि गहबरा गांव के लोगों जैसी जिन्होंने बगैर सरकारी मदद के पहाड़ पर 332 सीढ़ियां बनवा दीं. साथ ही यहां बिजली की व्यवस्था भी कर दी और अभी भी यहां सीढ़ियां, पानी की टंकी और टीन शेड का निर्माण बाकी है, जिसे जल्द ही शुरू किया जाएगा.
छतरपुरः जिले के गौरिहार तहसील के गहबरा गांव में मौजूद बड़े पहाड़ की ऊंचाई में माता जी का प्राचीन स्थान है. जहां तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां ही नहीं थीं. शारदीय और चैत्र नवरात्रि में यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. लेकिन सीढ़ियां न होने की वज़ह से श्रद्धालु परेशान होते थे. गांव वालों ने नेताओं से गुहार भी लगाई लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया. इसके बाद गांव के लोगों ने ही तय किया और बगैर सरकारी मदद के सीढ़ियां बनवा दीं.
पहाड़ की ऊंचाई पर माता विराजमान हैं
स्थानीय निवासी रामानंद दीक्षित बताते हैं कि इस गांव का जो पहाड़ है वह तो पुराना है ही. साथ में इस पहाड़ की ऊंचाई पर माता का स्थान है, यह स्थान 500 साल से भी अधिक पुराना बताया जाता है. यहां सात बहने(माहेश्वरी माता और दुर्गा माता समेत 7 देवियां) निवास करती हैं. साथ ही यहां पर नांदला देवी का भी स्थान है जो सबसे ऊंचाई पर विराजमान हैं. शारदीय और चैत्र नवरात्र में यहां हजारों की संख्या में भक्त गण आते हैं. साथ ही विवाहित जोड़ों की बधाई भी यहीं से पूजी जाती है. लेकिन यहां तक जाने के लिए रास्ता नहीं था. इसलिए गहबरा गांव के लोगों ने खुद ही चंदा जोड़कर सीढ़ियां बनवा दीं.
गांव के स्थानीय निवासी धीरेन्द्र अवस्थी बताते हैं कि पहाड़ की ऊंचाई पर बैठी माता जी के पावन स्थल पर पहुंचने के लिए पुराने लोगों ने पहाड़ के दूसरी तरफ़ से रास्ता बनाई थी लेकिन वहां से अब जाने लायक रास्ता नहीं है. क्योंकि वहां सिर्फ कच्ची रास्ता है, सीढ़ियां नहीं बनी थीं और जो पत्थरों की कुछ पुरानी सीढ़ियां थीं वह भी टूट चुकी थीं. जिसके चलते गांव के लोगों को वहां तक जाने में दिक्कत होती थी.
6 लाख रुपए का किया चंदा इकट्ठा
गांव वालों ने शासन-प्रशासन से कई बार गुहार भी लगाई. लेकिन किसी नेता-अधिकारी ने इस पहाड़ की सीढ़ियों के विकास को लेकर ध्यान नहीं दिया. थक हार कर गांव वालों ने ही निर्णय लिया और खुद 6 लाख रुपए का चंदा इकट्ठा किया और इसी चंदे से सीमेंट, गिट्टी और बालू मंगवाई और गांव के ही लोगों ने ही मजदूर बनकर ऊपर सीमेंट, गिट्टी और पत्थर धोकर सीढ़ियों का निर्माण कराया.
332 सीढ़ियों का निर्माण हुआ पूरा
हालांकि अभी भी पूरी सीढ़ियों का निर्माण नहीं हुआ है. अभी 332 सीढ़ियां ही बनाई गई हैं. ऊपर कुछ सीढ़ियां बनना बाकी हैं जिस पर अभी जल्द ही काम चालू होगा. गांव के बांके बिहारी मंदिर के पुजारी रामफल शुक्ला बताते हैं कि हमने नेताओं से कई बार गुहार भी लगाई. लेकिन किसी भी नेता ने हमारी सीढ़ियों के विकास को लेकर नहीं सोचा और ना ही ध्यान दिया. इसलिए गांव के लोगों को मजबूरन सीढ़ियां बनवानी पड़ी और अब गांव के लोगों ने तय किया है कि अब आगे भी गांव के लोग ही यहां पर विकास करेंगे. इसलिए अब हम टीन शेड, रैलिंग और पानी की टंकी का निर्माण भी कराने जा रहे हैं. बिजली खंभों की व्यवस्था हमने पहले ही कर दी थी.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें