नई दिल्ली. जब भी क्रिकेट वर्ल्ड कप का मंच सजता है, मैच शुरू होने से पहले राष्ट्रगान की गूंज माहौल को भावुक और गर्व से भर देती है. खिलाड़ी सीना तानकर खड़े होते हैं, दर्शक तालियों से सम्मान जताते हैं. लेकिन इसी मंच पर एक टीम ऐसी भी उतरती है, जिसके लिए ना राष्ट्रगान बजता है और ना ही किसी एक देश का झंडा लहराता है यह टीम है वेस्टइंडीज.
फरवरी में शुरु होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप में जिसकी मेजबानी भारत श्रीलंका कर रहे है उसमें भी वेस्टइंडीज़ के मैच से पहले राष्ट्रगान नहीं बजेगा. कारण वही रहेगा वेस्टइंडीज़ का किसी एक देश का प्रतिनिधित्व ना करना. यह नियम दशकों से चला आ रहा है और भविष्य में भी इसमें बदलाव की संभावना बेहद कम है. ICC टूर्नामेंट्स में जब वेस्टइंडीज़ खेलती है, तब उनका कोई राष्ट्रगान नहीं बजता . कभी-कभी सिर्फ ICC का एंथम सुनाया जाता हैकई बार सीधे टॉस और मैच की कार्रवाई शुरू हो जाती है यह दृश्य अक्सर दर्शकों को हैरान कर देता है, लेकिन इसके पीछे की वजह पूरी तरह नियमों और इतिहास से जुड़ी है.
वेस्टइंडीज का नहीं है राष्ट्रगान
वेस्टइंडीज का कोई राष्ट्रगान नहीं है क्योंकि यह एक देश नहीं है, बल्कि कई कैरेबियाई देशों का एक संघ है. इस संघ में कई देश शामिल हैं, जैसे कि जमैका, त्रिनिदाद और टोबैगो, बारबाडोस, आदि. इसलिए, जब वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम मैच खेलती है, तो उनके पास एक भी राष्ट्रगान नहीं होता है. वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने डेविड रूडर के गीत “रैली राउंड द वेस्टइंडीज” को टीम के गान के रूप में अपनाया है. यह गीत 1987 में रिलीज़ हुआ था और 1999 में इसे आधिकारिक तौर पर वेस्टइंडीज टीम के गान के रूप में अपनाया गया था. यह गीत वेस्टइंडीज की एकता और गर्व को दर्शाता है. वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के मैचों में अक्सर तीन राष्ट्रगान बजाए जाते हैं पहला त्रिनिदाद और टोबैगो का राष्ट्रगान, दूसरा जिस टीम के खिलाफ मैच हो उसका राष्ट्रगान और तीसरा वेस्टइंडीज का गाना “रैली राउंड द वेस्टइंडीज.
वेस्टइंडीज का सुनहरा इतिहास
वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम का इतिहास बहुत ही रोमांचक है. वे 1970 और 1980 के दशक में दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में से एक थे. उनके पास विवियन रिचर्ड्स,क्लाइव लॉयड, गॉर्डन ग्रीनेज, और माइकल होल्डिंग जैसे महान खिलाड़ी थे. वेस्टइंडीज टीम ने 1975 और 1979 में दो बार क्रिकेट विश्व कप जीता था. वे 1983 में भी फाइनल में पहुंचे थे, लेकिन भारत से हार गए थे. वेस्टइंडीज टीम की ताकत उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और तेज गेंदबाजी थी. वे अपने समय में दुनिया की सबसे तेज गेंदबाजी आक्रमण के लिए जाने जाते थे, जिसमें माइकल होल्डिंग, एंडी रॉबर्ट्स, और जोएल गार्नर जैसे गेंदबाज शामिल थे. हालांकि, 1990 के दशक के बाद वेस्टइंडीज टीम की प्रदर्शन में गिरावट आई. वे कई वर्षों तक विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए. लेकिन 2012 में वे टी20 विश्व कप के फाइनल में पहुंचे थे, और 2016 में वे सेमीफाइनल में पहुंचे थे.