अरे छोड़ो महंगे कफ सिरप की झंझट, मुलेठी-अदरक-हल्दी से घर पर बनाओ देसी काढ़ा, मैगी से भी जल्दी होगी तैयार!

अरे छोड़ो महंगे कफ सिरप की झंझट, मुलेठी-अदरक-हल्दी से घर पर बनाओ देसी काढ़ा, मैगी से भी जल्दी होगी तैयार!


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Dry Cough Home Remedies: ठंड के मौसम में सूखी खांसी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है. बदलती हवा और गिरते तापमान के बीच बघेलखंड में एक पारंपरिक देसी उपाय फिर चर्चा में है. स्थानीय महिलाएं बता रही हैं कि कुछ ही मिनटों में तैयार होने वाला यह घरेलू काढ़ा बिना दवा के राहत देने में असरदार साबित हो रहा है.

शिवांक द्विवेदी, सतना: ठंड का मौसम शुरू होते ही सूखी खांसी, गले में खराश और जलन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. ठंडी हवा, बदलता तापमान और कमजोर होती रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण लोग लगातार खांसते रहते हैं जिससे दिनचर्या के साथ-साथ नींद भी प्रभावित होती है. ऐसे में अधिकतर लोग तुरंत दवाइयों का सहारा लेते हैं लेकिन बघेलखंड अंचल में आज भी दादी-नानी के बताए देसी नुस्खों पर लोगों का भरोसा कायम है. ये नुस्खे न सिर्फ घर में आसानी से उपलब्ध सामग्री से तैयार हो जाते हैं बल्कि बिना किसी साइड इफेक्ट के धीरे-धीरे असर दिखाते हैं. यही वजह है कि नई पीढ़ी की महिलाएं भी अब इन पारंपरिक उपायों को अपनाने लगी हैं.

दादी-नानी के नुस्खों पर क्यों है भरोसा
बघेलखंड में पीढ़ियों से चले आ रहे घरेलू उपचार आज भी लोगों के जीवन का अहम हिस्सा हैं. स्थानीय निवासी उर्मिला मिश्रा लोकल 18 से बताती हैं कि पहले गांवों में डॉक्टर या दवाइयां आसानी से उपलब्ध नहीं होती थीं ऐसे में दादी-नानी अपने अनुभव से देसी इलाज बताया करती थीं. सूखी खांसी, जुकाम और गले की तकलीफ में ये नुस्खे रामबाण साबित होते थे. समय के साथ भले ही आधुनिक दवाइयां आ गई हों लेकिन ठंड के मौसम में लोग आज भी इन घरेलू उपायों पर ज्यादा भरोसा करते हैं क्योंकि ये शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाते और प्राकृतिक तरीके से राहत देते हैं.

वर्षों से चला आ रहा है देसी काढ़े का चलन
ठंड के दिनों में सूखी खांसी से बचाव के लिए बघेलखंड में एक खास काढ़ा वर्षों से बनाया जा रहा है. इस काढ़े को बनाना बेहद आसान है और इसमें इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्री आमतौर पर हर घर की रसोई में मिल जाती हैं. इस पारंपरिक काढ़े में मुलैठी की डंडी, एक चुटकी हल्दी और अदरक का छोटा टुकड़ा इस्तेमाल किया जाता है. ये तीनों ही सामग्री अपने औषधीय गुणों के लिए जानी जाती हैं और गले की समस्याओं में बेहद असरदार मानी जाती हैं.

कैसे तैयार करें बघेलखंडी काढ़ा
इस काढ़े को बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में पानी लें और उसमें मुलैठी की डंडी, हल्दी और अदरक डाल दें. इसके बाद इसे 2 से 3 मिनट तक अच्छे से उबालें. जब पानी का रंग बदलने लगे और खुशबू आने लगे तो इसे छान लें. उसके बाद काढ़ा गुनगुना रहते हुए ही इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पी ले. गुनगुना काढ़ा गले को तुरंत राहत देता है और खांसी की जलन को कम करता है.

कितनी बार पीने से मिलता है फायदा
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि इस काढ़े का एक या दो बार सेवन करने से ही सूखी खांसी में काफी राहत महसूस होने लगती है. अगर हफ्ते में चार से पांच बार इसका सेवन किया जाए तो ठंड के मौसम में गले और खांसी से जुड़ी समस्याएं धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं. खास बात यह है कि यह देसी नुस्खा बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए सुरक्षित माना जाता है

 नई पीढ़ी भी अपना रही देसी उपाय
बदलती जीवनशैली और बढ़ते प्रदूषण के बीच लोग अब फिर से प्राकृतिक और घरेलू उपचारों की ओर लौट रहे हैं. बघेलखंड के दादी-नानी के ये नुस्खे आज सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि ठंड के मौसम में सेहत की सुरक्षा का भरोसेमंद तरीका बनते जा रहे हैं. सूखी खांसी से परेशान लोगों के लिए यह देसी काढ़ा आज भी उतना ही कारगर माना जाता है जितना दशकों पहले था.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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मुलेठी-अदरक-हल्दी से घर पर बनाओ देसी काढ़ा, मैगी से भी जल्दी होगी तैयार!

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



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