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White Owl News: बालाघाट में 100 साल पुराना से अजीब उल्लू निकले. इन पक्षियों की वजह से पूरे शहर में हड़कंप मच गया. लोग इन्हें देखने के लिए जुट गए. क्योंकि, सफेद उल्लू बेहद दुर्लभ माने जाते हैं. अब इस घर में ये कैसे आए, फिलहाल ये सवाल है. वही, इनके बारे में एक्सपर्ट ने बेहद खास बात बताई.
Balaghat News: मध्य प्रदेश के बालाघाट में गजब घटना घटी. यहां 100 साल पुराने एक जर्जर मकान को तोड़ा जा रहा था. तभी उसमें कुछ ऐसा दिखा कि लोगों के होश उड़ गए. मकान में अजीब से पक्षी दिखे. इनकी आकृति तो उल्लू जैसी थी पर रंग काला नहीं, सफेद था. ऐसे में लोगों को हैरानी हो गई कि आखिर ये उल्लू आए कहां से उन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ गई. जब लोकल 18 टीम ने वन्य प्राणी विशेषज्ञ अभय कोचर से बातचीत तब बड़ा खुलासा हुआ, जो आपको भी हैरान कर देगा.
बालाघाट के वारासिवनी में 100 साल पुराना मकान था. जर्जर होने की वजह से इसे तोड़ा जा रहा है. तभी मकान में सफेद रंग के उल्लू के चार बच्चे दिखाई पड़े. ये सफेद उल्लू देखते ही मकान तोड़ने वाले हैरान हो गए. ये मकान उपेंद्र बांगरे का है. उन्होंने बताया कि उनका मकान जर्जर था और 100 साल पुराना है. ऐसे में इसे तोड़ते वक्त सफेद उल्लू नजर आए. ये बात शहर में फैल गई और लोगों में उत्सुकता होने लगी कि सफेद उल्लू कैसे आए और इनकी क्या खासियत है. मौके पर भीड़ जमा हो गई.
इंसानी दिल जैसा चेहरा
सफेद उल्लू आकार से तो काले उल्लू की तरह ही दिखता है. लेकिन, जब इन उल्लुओं को करीब से देखा गया तो नई बात पता चली. दरअसल, इस उल्लू का चेहरा इंसानी दिल के आकार का था. इसकी चोंच और आंखें काले उल्लू के मुकाबले काफी छोटी थीं. वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अभय कोचर ने बताया, सफेद उल्लू कम दिखते हैं, इसलिए इसे देखकर लोग दंग रह जाते हैं. वारासिवनी में देखा उल्लू बर्न ऑउल प्रजाति का है. इसे आम तौर पर खलियानी उल्लू भी कहा जाता है.
किसान का दोस्त है सफेद उल्लू
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट ने बताया, सफेद उल्लू एक तरह से किसानों का दोस्त है. यह जैव विविधता में अहम रोल अदा करता है. दरअसल, वह एक दिन में सात से आठ चूहों को खा लेता है. ऐसे में वह किसानों का मित्र भी कहलाता है, यानी वह जैविक तरह से कीटों और पेस्ट को खत्म करने का काम करता है.
सफेद उल्लू का अस्तित्व खतरे में
अभय कोचर बताते हैं कि अब सफेद उल्लू का अस्तित्व खतरे में है. इसकी वजह है कि खेतों से उनके प्राकृतिक आवास को तोड़ा जा रहा है. दरअसल, सफेद उल्लू सूखे पेड़ों पर अपना घर बनाते हैं. इसके अलावा पुराने घरों में ये उल्लू अपना आशियाना बनाते हैं. ऐसे में पुराने घर भी खत्म हो रहे है और खेत से भी पेड़ कटने लगे है. ऐसे में किसानों का दोस्त कहे जाने वाला सफेद उल्लू की प्रजाति विलुप्ति कगार पर है. ऐसे में इसके संरक्षण के लिए संगठित प्रयास करना चाहिए, ताकी जैव विविधता बची रहे.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें