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2026 में मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों की छोटी कारों की बिक्री में 92 प्रतिशत उछाल आया, GST 2.0 कटौती और किफायती कीमतों से मिडिल क्लास का रुझान फिर बढ़ा है. बीते कुछ सालों में भारत के ऑटोमोबाइल मार्केट में एसयूवी गाड़ियों का ट्रेंड जोर पकड़ रहा है. इन सबके बीच एक बार फिर अब लोग बजट कारों में अपनी दिलचस्पी दिखाते हुए शोरूम का रुख कर रहे हैं.
भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बड़ी खुशखबरी के साथ हुई है. पिछले कुछ सालों से जहां ग्राहकों का झुकाव एसयूवी (SUV) की ओर था, वहीं अब एक बार फिर ‘मिडिल क्लास’ की पसंदीदा छोटी कारों का जलवा लौट आया है.

भारतीय सड़कों पर एक बार फिर छोटी और किफायती कारों का शोर सुनाई देने लगा है. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के शुरुआती दौर में 5 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों की बिक्री में 92 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल देखा गया है.

मारुति सुजुकी जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए यह आंकड़े संजीवनी की तरह आए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि भारतीय खरीदार अब फिर से बचत और माइलेज की ओर रुख कर रहा है.
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छोटी कारों की बिक्री में उछाल का मुख्य कारण जीएसटी में कटौती रही. सरकार ने बीते साल सितंबर में जीएसटी दरों में कटौती की थी.

हाल ही में सरकार द्वारा बजट सेगमेंट की कारों पर ‘GST 2.0’ के तहत टैक्स दरों को तर्कसंगत बनाया गया है. जीएसटी दरों में कमी आने से इन कारों की ऑन-रोड कीमत काफी कम हो गई है, जिससे मध्यम वर्ग के लिए कार खरीदना आसान हो गया है.

आंकड़ों के अनुसार, छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में बजट कारों की मांग में 35% से ज्यादा की ग्रोथ हुई है. बेहतर बुनियादी ढांचे और खेती-किसानी से जुड़ी आय में सुधार ने भी लोगों को पहली कार खरीदने के लिए प्रेरित किया है.

पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच, छोटी कारों का बेहतरीन माइलेज (25 किमी/लीटर तक) और कम सर्विसिंग खर्च आज भी ग्राहकों की पहली पसंद बना हुआ है.

एसयूवी के बढ़ते ट्रेंड के बीच एंट्री-लेवल कारों में 92% की ग्रोथ यह साबित करती है कि भारतीय ऑटो बाजार में “अफोर्डेबिलिटी” (किफायती दर) आज भी सबसे बड़ा फैक्टर है. कार कंपनियों का मानना है कि यदि यह ट्रेंड जारी रहा, तो साल 2026 भारतीय ऑटोमोबाइल इतिहास के लिए रिकॉर्ड तोड़ साल साबित हो सकता है.