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Indore News: लोकल 18 की टीम ने दिन भर भागीरथपुरा के विभिन्न स्थानों पर जाकर लोगों से बात की. यहां के निवासी राजाराम बोरासी कहते है कि इसमें कोई शक नहीं कि दूषित जल कांड की वजह से इंदौर की छवि पर गहरा प्रभाव पड़ा है. लेकिन इंदौर की स्वच्छता पर कोई दोराय नहीं है. भागीरथपुरा में जो हुआ. वह जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से हुआ. अगर पाइपलाइंस को पहले ही ठीक किया जाता तो यह नौबत नहीं आती.
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला इस समय पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस पर जमकर राजनीति भी हो रही है. वहीं, इंदौर के सबसे स्वच्छ शहर का ताज भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ है. दूषित पानी कांड के बाद इंदौर की स्वच्छता पर भी सवाल उठाए जा रहे है. हाल ही में, विपक्ष के नेता उमाशंकर ने आरोप लगाया था कि इंदौर की स्वच्छता भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल की गई है. हमने इस मामले की पड़ताल की और भागीरथपुरा के लोगों से ही पूछा कि क्या वे भी इंदौर की स्वच्छता और दूषित पानी के मामले को एक साथ जोड़कर देखते है.
लोकल 18 की टीम ने दिन भर भागीरथपुरा के विभिन्न स्थानों पर जाकर लोगों से बात की. यहां के निवासी राजाराम बोरासी कहते है कि इसमें कोई शक नहीं कि दूषित जल कांड की वजह से इंदौर की छवि पर गहरा प्रभाव पड़ा है. लेकिन इंदौर की स्वच्छता पर कोई दोराय नहीं है. भागीरथपुरा में जो हुआ. वह जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से हुआ. अगर पाइपलाइंस को पहले ही ठीक किया जाता तो यह नौबत नहीं आती.
एक अन्य निवासी ने खुलकर कहा कि इंदौर की सफाई को लेकर कोई सवाल नहीं है. वह देशभर में सफर करते है और यहां से अच्छी सफाई कहीं नहीं मिलती. भागीरथपुरा में अभी नर्मदा की लाइन का काम पहले से ही चल रहा था. लेकिन साथ ही ड्रेनेज की शिकायत भी मिल रही थी. अगर इस पर ध्यान दिया जाता और इसे दुरुस्त कर दिया जाता तो यह शिकायत भी नहीं आती. अब कार्य तेजी से किया जा रहा है. जिससे फिर से लोगों को साफ पानी मिलने लगेगा.
लोकल 18 की टीम ने घूम-घूम कर भागीरथपुरा में करीब दो दर्जन लोगों से बात की. जाहिर है दूषित जल को लेकर सभी के मन में आक्रोश था. वहीं स्वच्छता पर किसी ने भी सवाल नहीं उठाए. लोगों का मानना है कि इंदौर में स्वच्छता पर पूरी तरह ध्यान दिया जाता है और कहीं कोई गंदगी नहीं मिलती.
भागीरथपुरा में अब तक दूषित पानी की वजह से 20 लोगों की जान जा चुकी है. वहीं कई लोग अभी आईसीयू में भर्ती है. प्रशासन मुस्तैदी से दिन-रात लगकर पाइपलाइन डालने में जुटा है. फिलहाल, केवल टैंकर का पानी ही लोगों के लिए सहारा बना हुआ है. फिर भी लोगों के मन में एक खौफ पैदा हुआ है और वे केवल उबला हुआ और RO का पानी ही पी रहे है.