नई दिल्ली. 2019 में संजय मांजरेकर ने एक क्रिकेट विश्लेषक के तौर पर शायद अपनी सबसे बड़ी गलती तब की, जब उन्होंने रवींद्र जडेजा को ‘बिट्स एंड पीसेज़’ खिलाड़ी कह दिया. बाएं हाथ के इस ऑलराउंडर ने इस टिप्पणी को हल्के में नहीं लिया और पूर्व भारतीय क्रिकेटर को गलत साबित करने की ठान ली. जडेजा इसमें कामयाब भी रहे वो भी सिर्फ एक नहीं, बल्कि तीनों फॉर्मेट में लेकिन यह सिलसिला टी20 अंतरराष्ट्रीय में 2022 तक ही चला .इसके बाद उन्होंने 2024 में विश्व कप जीत के बाद इस फॉर्मेट से संन्यास ले लिया. वहीं वनडे में उनका सर्वश्रेष्ठ दौर 2023 तक ही देखने को मिला, जब वे अपने शिखर पर थे.
टेस्ट क्रिकेट में जडेजा निस्संदेह भारत के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडरों में से एक रहे हैं और दिसंबर 2024 में रविचंद्रन अश्विन के संन्यास के बाद वे सबसे भरोसेमंद नाम बनकर उभरे. हालांकि, पिछले दो वर्षों में सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनका प्रदर्शन बेहद साधारण रहा है. खासकर वनडे क्रिकेट में उनके करियर पर अब सवालिया निशान लगने लगे हैं चाहे वह मैचों की कमी हो या फिर बल्ले और गेंद दोनों से प्रभावहीन प्रदर्शन. जहां तक टी20 अंतरराष्ट्रीय की बात है, वह अध्याय तो उनके लिए बंद हो चुका है. ऐसे में सफेद गेंद के क्रिकेट में अब पूरा फोकस वनडे फॉर्मेट पर है. अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ियों ने 50 ओवर के प्रारूप में खुद को जडेजा के संभावित विकल्प के रूप में पेश किया है ऐसे में जडेजा के पास खुद को साबित करने और अपने वनडे करियर को आगे बढ़ाने के लिए अब बहुत कम समय बचा है.
वनडे में जडेजा की गिरावट का विश्लेषण
2023 विश्व कप के साल में,जहां भारत को फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों दिल तोड़ने वाली हार का सामना करना पड़ा, जडेजा ने 26 मैच खेले. इन मुकाबलों में उन्होंने 30.90 की औसत से 309 रन बनाए और 31 विकेट झटके. इससे पहले, 2019 विश्व कप के बाद से उन्होंने 12 मैचों में सिर्फ 259 रन बनाए और 8 विकेट लिए. यहीं से उनके प्रदर्शन में गिरावट शुरू मानी जा सकती है. इसके बाद 2024 में उन्होंने एक भी वनडे मैच नहीं खेला, जबकि 2025 और 2026 में मिलाकर उन्होंने सिर्फ 13 वनडे खेले, जिनमें उन्होंने 139 रन बनाए और 12 विकेट हासिल किए. भले ही उनके नाम 208 वनडे मैचों में 2866 रन और 232 विकेट दर्ज हों, लेकिन पिछले दो वर्षों में उनके प्रदर्शन में आई गिरावट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यही वजह है कि कई लोग मानने लगे हैं कि जडेजा अपने करियर के अंतिम चरण में हैं और उनके संभावित विकल्पों ने टीम में अपनी जगह बनाने के लिए पर्याप्त प्रदर्शन कर लिया है.
अक्षर पटेल का एंगल
अक्षर पटेल ने भले ही 2014 में वनडे डेब्यू किया हो, लेकिन पिछले एक साल में उन्होंने इस फॉर्मेट में जबरदस्त प्रगति की है. टी20 अंतरराष्ट्रीय में ऊपर के क्रम में बल्लेबाजी करते हुए उनके प्रभावशाली प्रदर्शन ने न सिर्फ कप्तान और कोच, बल्कि चयनकर्ताओं का भी भरोसा जीता है. वर्तमान भारत बनाम न्यूजीलैंड वनडे सीरीज में अक्षर इसलिए नहीं हैं क्योंकि वे टी20 विश्व कप टीम का हिस्सा हैं और टीम प्रबंधन उन्हें जरूरत से ज्यादा खिलाने का जोखिम नहीं लेना चाहता. हालांकि, जून में इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली सीरीज में उनकी वापसी तय मानी जा रही है. इसका मतलब है कि जडेजा के पास खुद को साबित करने के लिए महज दो वनडे मैच ही बचे हैं. 2025 में अक्षर पटेल ने 11 वनडे मैचों में 290 रन बनाए और 11 विकेट लिए, जो अब तक उनके वनडे करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है.
वॉशिंगटन सुंदर की अनुपस्थिति: जडेजा के लिए वरदान?
हालांकि जडेजा के पास अब गिने-चुने मौके ही बचे हैं, लेकिन वॉशिंगटन सुंदर की चोट उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. तमिलनाडु के इस ऑलराउंडर को भारत बनाम न्यूजीलैंड पहले वनडे के दौरान पसली में चोट लगी, जिसके चलते वे पूरी सीरीज से बाहर हो गए. सुंदर की गैरमौजूदगी में जडेजा टीम में एकमात्र विशेषज्ञ स्पिन ऑलराउंडर हैं. ऐसे में उनके पास चयनकर्ताओं को प्रभावित करने का सुनहरा और शायद आखिरी मौका है. उन्हें इन दो मैचों में बल्ले और गेंद दोनों से दमदार प्रदर्शन करना होगा, ताकि अपने वनडे करियर को आगे बढ़ा सकें.इसके अलावा, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि अक्षर, सुंदर, रियान पराग और आयुष बदोनी जैसे खिलाड़ी न सिर्फ 2027 वनडे विश्व कप की दौड़ से जडेजा को बाहर कर सकते हैं, बल्कि उनके 50 ओवर के करियर पर भी पूरी तरह विराम लगा सकते हैं वह भी जल्द ही.
नंबर 5 पर नाकामी
जडेजा को नंबर 5 या 6 पर बल्लेबाजी कराने का प्रयोग न तो टीम इंडिया के लिए सफल रहा और न ही उनकी पूर्व आईपीएल फ्रेंचाइज़ी चेन्नई सुपर किंग्स के लिए नंबर 5 और 6 पर उन्होंने क्रमशः 3 और 10 वनडे मैचों में सिर्फ 30 और 180 रन बनाए हैं. इसके उलट, नंबर 7 पर बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 100 वनडे मैचों में 2056 रन बनाए हैं, जो उनके लिए सबसे प्रभावी स्थान साबित हुआ है. भारत बनाम न्यूजीलैंड पहले वनडे में जडेजा का प्रदर्शन खासा आलोचना का शिकार हुआ, जब उन्होंने सिर्फ 5 गेंदों में 4 रन बनाए और एक गैरज़रूरी शॉट खेलकर आउट हो गए, जबकि टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी. टीम में बल्लेबाजों की कोई कमी नहीं है, ऐसे में अगर उन्हें दूसरा वनडे खेलने का मौका मिलता है, तो जडेजा को बल्ले से दमदार प्रदर्शन कर अपने आलोचकों को जवाब देना होगा क्योंकि समय तेजी से निकलता जा रहा है.
आंकड़े भले ही यह दिखाते हों कि आईपीएल 2025 में जडेजा ने CSK के लिए मध्यक्रम में अच्छा प्रदर्शन किया उन्होंने 301 रन बनाए, दो अर्धशतक जड़े और उनका स्ट्राइक रेट 135 से थोड़ा ज्यादा रहा लेकिन नई गेंद का सामना करते समय उनका स्ट्राइक रेट काफी कमजोर रहा और उनकी तकनीक आधुनिक सफेद गेंद क्रिकेट के अनुरूप नहीं दिखी. एक बार फिर यह बात सामने आती है कि हालिया आंकड़ों को देखते हुए जडेजा की बल्लेबाजी सफेद गेंद के मौजूदा दौर की जरूरतों के हिसाब से पुरानी पड़ती जा रही है.