ठंड में सूख रही घर की बगिया को पिला दें ये ‘देसी घोल’, लहलहा उठेंगे पौधे, फल-फूल से लद जाएंगे

ठंड में सूख रही घर की बगिया को पिला दें ये ‘देसी घोल’, लहलहा उठेंगे पौधे, फल-फूल से लद जाएंगे


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Home Gardening Tips: ठंड के मौसम में जब पौधों की बढ़वार रुकने लगती है और मिट्टी की ताकत कम हो जाती है तब जीवामृत खाद प्राकृतिक रूप से मिट्टी में जान फूंकने का काम करती है. यह देसी खाद जड़ों को मजबूत बनाती है, पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और बिना केमिकल के बगिया को हरा-भरा बनाए रखने में मदद करती है.

Gardening Tips: ठंड का मौसम आते ही किचन गार्डन और खेतों में लगे पौधों की रफ्तार धीमी पड़ने लगती है. मिट्टी ठंडी होकर सख्त हो जाती है, जिससे जड़ों का विकास रुकता है और पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता. ऐसे में रासायनिक खाद के बजाय अगर देसी और प्राकृतिक उपाय अपनाया जाए तो बगिया फिर से हरी-भरी हो सकती है. जीवामृत खाद इसी परंपरागत ज्ञान का बेहतरीन उदाहरण है, जो कम लागत में मिट्टी की सेहत सुधारने और पौधों को मजबूत बनाने का काम करती है. विशेषज्ञों का मानना है कि ठंड के मौसम में जीवामृत खाद का नियमित उपयोग पौधों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है.

क्या है जीवामृत खाद? कैसे करती है काम?
जीवामृत एक तरल देसी खाद है जो मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीवों को सक्रिय करती है. इसका मुख्य काम मिट्टी को जिंदा बनाना है ताकि पौधों को प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे जरूरी पोषक तत्व मिलते रहें. ठंड में जब रासायनिक खाद का असर कम हो जाता है तब जीवामृत मिट्टी की संरचना सुधारकर जड़ों की पकड़ मजबूत करती है. इससे पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, पत्तियां हरी रहती हैं और फूल व फल आने की प्रक्रिया तेज होती है. चाहे सब्जी हो या फलदार पौधे हो या फिर फूल हो सभी के लिए यह खाद समान रूप से फायदेमंद मानी जाती है.

ठंड के मौसम में जीवामृत के खास फायदे
ठंड में जीवामृत खाद मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद करती है जिससे पौधे सूखते नहीं हैं. यह जड़ों के आसपास के वातावरण को संतुलित रखती है जिससे ठंड का सीधा असर पौधों पर नहीं पड़ता. नियमित उपयोग से पौधों की बढ़वार बनी रहती है और उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है. सबसे बड़ी बात यह है कि जीवामृत से मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ रहती है जबकि रासायनिक खाद से मिट्टी धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है.

सीधे पौधे में न डालें..
जीवामृत को कभी गाढ़े रूप में सीधे पौधों में नहीं डालना चाहिए. बेहतर परिणाम के लिए इसे पानी में घोलकर जड़ों में देना चाहिए. ठंड के मौसम में 10 से 15 दिन के अंतराल पर इसका प्रयोग करना उपयुक्त माना जाता है. एक पौधे के लिए लगभग आधा लोटा जीवामृत में एक लोटा पानी मिलाकर जड़ों में डालना पर्याप्त होता है. चाहें तो इसे सिंचाई के पानी के साथ भी दिया जा सकता है जिससे खाद पूरे क्षेत्र में समान रूप से फैल जाती है.

जीवामृत खाद बनाने की प्रक्रिया
जीवामृत बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़ा ड्रम लें और उसमें लगभग 30 किलो देशी गाय का गोबर डालें. इसके बाद 1 किलो गुड़ और 1 किलो बेसन डालें. अब ड्रम को पानी से भरकर सभी सामग्री को अच्छी तरह मिला लें. इस मिश्रण को ढककर छायादार जगह पर करीब 15 दिनों तक छोड़ दें. इस दौरान रोज एक बार लकड़ी की डंडी से इसे घोलते रहें ताकि फर्मेंटेशन प्रोसेस सही तरीके से हो सके. 15 दिन बाद जीवामृत खाद उपयोग के लिए तैयार हो जाती है.

कम खर्च, ज्यादा फायदा
जीवामृत खाद की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सस्ती पर्यावरण के अनुकूल और लंबे समय तक असरदार है. यही कारण है कि आज किसान ही नहीं, बल्कि शहरी इलाकों में किचन गार्डन लगाने वाले लोग भी इसे तेजी से अपना रहे हैं. ठंड में अगर आप अपनी बगिया को सुरक्षित और उपजाऊ रखना चाहते हैं तो जीवामृत खाद एक भरोसेमंद देसी विकल्प साबित हो सकती है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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