Last Updated:
Low Tunnel Technology: किसान जनवरी माह में टमाटर, फूलगोभी, बैंगन, खीरा और लौकी की नर्सरी तैयार कर फरवरी में रोपाई कर सकते हैं. लो टनल या मिनी पॉलीहाउस तकनीक से पौधे ठंड से सुरक्षित रहते हैं. मार्च-अप्रैल में फसल मिलने से बाजार में बेहतर दाम और किसानों को अच्छी कमाई का मौका मिलता है.
Vegetable Nursery Farming: मध्य प्रदेश के सीधी जिला में किसान अब सिर्फ पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रह गए हैं. बदलते समय और बाजार की मांग को देखते हुए वे तेजी से सब्जियों की उन्नत खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. वजह साफ है कम समय में ज्यादा उत्पादन और बेहतर मुनाफा. खासकर जनवरी का महीना सब्जियों की नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे मुफीद माना जा रहा है.
जनवरी में नर्सरी, फरवरी में रोपाई
किसान सलाहकार कृष्णकांत तिवारी के मुताबिक जनवरी में तैयार की गई नर्सरी से फरवरी के पहले सप्ताह में खेतों में रोपाई की जा सकती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि मार्च-अप्रैल में फसल जल्दी बाजार में आ जाती है. उस समय पुरानी सब्जियां लगभग खत्म हो चुकी होती हैं, जिससे नई फसल को मंडी में अच्छे दाम मिलते हैं.
कौन-कौन सी सब्जियां हैं फायदेमंद?
जनवरी के महीने में टमाटर, फूलगोभी, बैंगन, खीरा और लौकी जैसी सब्जियों की नर्सरी आसानी से तैयार की जा सकती है. इन सब्जियों की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है और जल्दी फसल आने पर कीमत भी अच्छी मिलती है. यही वजह है कि किसान इन फसलों की ओर ज्यादा रुझान दिखा रहे हैं.
सीधे खेत में रोपाई क्यों नहीं?
कृष्णकांत तिवारी बताते हैं कि जनवरी में अगर सीधे खेत में पौध रोपित की जाए तो ठंड के कारण पौधों में गलन और मरने की समस्या आ जाती है. इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसलिए बेहतर यही है कि पहले नर्सरी तैयार की जाए और पौधों को मजबूत होने दिया जाए.
लो टनल और मिनी पॉलीहाउस बना रहे सहारा
नर्सरी को ठंड से बचाने के लिए किसान लो टनल या मिनी पॉलीहाउस तकनीक अपना सकते हैं. इस तकनीक से नर्सरी के अंदर तापमान नियंत्रित रहता है, जिससे पौधे ठंड के असर से सुरक्षित रहते हैं. नतीजा स्वस्थ पौधे, जल्दी बढ़वार और बेहतर फलन.
लागत कम, मुनाफा ज्यादा
घर पर ही नर्सरी तैयार करने से किसानों को बाहर से पौधे खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे लागत कम होती है और मुनाफा सीधे बढ़ता है. नर्सरी बनाते समय क्यारी की चौड़ाई ढाई से तीन मीटर रखें, जबकि लंबाई अपनी सुविधा के अनुसार रखी जा सकती है. वैज्ञानिक तरीके से तैयार की गई नर्सरी तेजी से विकसित होती है और पौधे पूरी तरह स्वस्थ रहते हैं.
About the Author
Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें