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team india asst coach statement: डोएशे ने मैच के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, हम हमेशा हर मैच जीतने की कोशिश करते हैं, साथ ही टीम के मध्यम और दीर्घकालिक विकास को भी ध्यान में रखते हैं. लेकिन निश्चित रूप से हमें ऐसा करना होगा कि विपक्षी टीमों के मन में भारत में खेलने का डर फिर से पैदा हो.
नई दिल्ली. न्यूजीलैंड ने खिलाफ दूसरे वनडे में भारत की सात विकेट की हार के बाद सहायक कोच रेयान टेन डोएशे ने बुधवार कहा कि भारतीय टीम को विरोधी टीमों के दिमाग में भारत में खेलने का डर फिर से पैदा करने की जरूरत है. न्यूजीलैंड ने हर विभाग में भारत को पीछे छोड़ते हुए 285 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 47.3 ओवर में तीन विकेट पर 286 रन बना लिए. डेरिल मिचेल की नाबाद 131 और विल यंग के 87 रन की पारी की बदौलत टीम ने आसानी से जीत दर्ज की.
डोएशे ने मैच के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, हम हमेशा हर मैच जीतने की कोशिश करते हैं, साथ ही टीम के मध्यम और दीर्घकालिक विकास को भी ध्यान में रखते हैं. लेकिन निश्चित रूप से हमें ऐसा करना होगा कि विपक्षी टीमों के मन में भारत में खेलने का डर फिर से पैदा हो.
विरोधी में डर पैदा करना होगा
यह लगातार दूसरी बार है जब तीन मैचों की श्रृंखला निर्णायक मैच तक पहुंच रही है इससे पहले भारत ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे वनडे में हार का सामना करने के बाद तीसरे वनडे में जीत दर्ज करके श्रृंखला अपने नाम की थी. डोएशे ने कहा टीम प्रबंधन विशेष रूप से अपनी स्पिन गेंदबाजी को बेहतर तरीके से खेलने पर ध्यान देगा और गेंदबाजों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करेगा. उन्होंने कहा, ‘‘हम अभी भी सोचते हैं कि 290 रन ठीक स्कोर था और हमें लगा था कि विकेट आज रात थोड़ा कठिन हो जाएगा. वास्तव में हमें बाद में गेंदबाजी करने में कोई आपत्ति नहीं थी.
खत्म हो रहा है फिरकी फोबिया
डोएशे ने कहा कि हम शायद आज की तुलना में थोड़ी बेहतर गेंदबाजी करना चाहेंगे विशेष रूप से स्पिन गेंदबाजी. किसी भी मैच में हार का सिर्फ एक कारण नहीं होता पर बुधवार की हार में कई अलग-अलग चीज़े शामिल थीं. राजकोट में न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने जिस तरह से भारतीय स्पिनर्स की पिटाई की उससे एक बात तो साफ हो गई है कि भारतीय पिचों पर भारतीय स्पिनर्स के खिलाफ रन बनाने की कला अब टेस्ट ही नहीं वनडे और टी20 में भी टीमें सीख चुकी है. कुलदीप यादव और रवींद्र जडेजा ने मिल कर 18 ओवर में 126 रन लुटाए जिसकी वजह से भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा. ये कहने में भी कोई गुरेज नहीं है कि अब फिरकी का फोबिया धीरे धीरे खत्म हो रहा है और आने वाली टीमें बेहतर तैयारी के साथ दौरे पर आती है.