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Jabalppur news: मध्यप्रदेश के जबलपुर के बंगालियों का 100 साल का इतिहास जमीन में दफन हो चुका है. इस टाइम कैप्सूल को जमीन से 6 फीट नीचे पीतल के कलश में दफन किया गया है. मध्यप्रदेश का यह पहला टाइम कैप्सूल है. जिसे जबलपुर के बंगाली समाज और बंगाली क्लब ने दफन किया है. जिसे अब आने वाले 100 साल बाद मतलब 2125 में बाहर निकाला जाएगा.
जबलपुर: मध्यप्रदेश के जबलपुर के बंगालियों का 100 साल का इतिहास जमीन में दफन हो चुका है. इस टाइम कैप्सूल को जमीन से 6 फीट नीचे पीतल के कलश में दफन किया गया है. मध्यप्रदेश का यह पहला टाइम कैप्सूल है. जिसे जबलपुर के बंगाली समाज और बंगाली क्लब ने दफन किया है. जिसे अब आने वाले 100 साल बाद मतलब 2125 में बाहर निकाला जाएगा. फिलहाल इस टाइम कैप्सूल में 1925 से लेकर 2025 मतलब 100 साल के इतिहास को संजोया गया हैं.
100 साल बाद निकलेगा टाइम कैप्सूल
3 लेयर तैयार कर जमीन में दफनाया, गूगल मैपिंग भी
सिटी बंगाली जॉइंट सेक्रेटरी अनुराग पॉल ने लोकल 18 से बताया टाइम कैप्सूल को नुकसान न हो, इसको लेकर 3 लेयर बनाकर कैप्सूल को 6 फीट गड्ढे में दफनाया गया है. साथ ही भविष्य में आने वाली पीढ़ी को कैप्सूल की जानकारी सही मिल सके. इसके लिए बकायदा गूगल मैपिंग भी की गई है. उन्होंने बताया जबलपुर में बंगाली क्लब का इतिहास 18वीं शताब्दी से शुरू हुआ था. जहां पहला बंगाली परिवार पश्चिम बंगाल से धार्मिक यात्रा पर निकला था और जबलपुर में आकर बस गया था. जिसके बाद यह सिलसिला शुरू हो गया था.
1925 में बनी थी जबलपुर बंगाली क्लब संस्था
उन्होंने बताया जबलपुर सिटी बंगाली क्लब की संस्था 1925 की है. जहां वर्तमान में सैकड़ो लोग संस्था से जुड़े हुए हैं. जबलपुर में बंगालियों की संख्या करीब 1 लाख से ज्यादा है. आने वाली पीढ़ी जबलपुर के बंगालियों का इतिहास और संस्था के बारे में जान सके. इसको लेकर जमीन के भीतर टाइम कैप्सूल को दफनाया गया है. टाइम कैप्सूल को पीतल के कलश के भीतर रखकर जमीन से करीब 6 फीट नीचे दफनाया गया है. जिससे संस्था के सारे रिकॉर्ड्स सुरक्षित रह सके और आने वाली पीढ़ी को सारी जानकारी मिल सके.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें